रांची. JPSC और JSSC-CGL परीक्षा मामले को लेकर भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने हाईकोर्ट में दाखिल किये गये सरकार के हलफनामों में कथित विरोधाभास को लेकर सवाल उठाया है. उन्होंने सरकार से पूछा कि पहली जांच में गलत रिपोर्ट देने वाले CID अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गयी है.
प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि JSSC-CGL परीक्षा के मामले में सरकार की भूमिका सवालों के घेरे में है. उनके अनुसार, पहले CID की जांच के आधार पर परीक्षा को क्लीन चिट दी गयी थी, जबकि बाद की जांच में परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर गिरफ्तारियां हुईं और जांच में पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आने का दावा किया गया.
पहली जांच और बाद की रिपोर्ट पर उठाये सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने पहले CID की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट में यह पक्ष रखा था कि प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था. उन्होंने दावा किया कि 115 प्रश्नों के लीक होने की बात को उस समय महज गेस पेपर से जुड़ा मामला बताया गया था.
प्रतुल शाहदेव के अनुसार, बाद की जांच में CID ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाये और सीटों के कथित सौदे की बात सामने आयी. उन्होंने कहा कि इसी आधार पर सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल अपने नये हलफनामे में परीक्षा की पवित्रता प्रभावित होने की बात स्वीकार की है.
'गलत जांच हुई तो जिम्मेदारी किसकी?'
प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि एक ही मामले में अलग-अलग रुख वाले शपथपत्र दाखिल किये गये हैं. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि पहली जांच गलत थी और उसी के आधार पर गलत हलफनामा दाखिल कराया गया था, तो संबंधित CID अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गयी है.
JPSC-JSSC नियुक्ति मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने 18 सितंबर की सुनवाई के बाद नियुक्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर लगी रोक बरकरार रखी है. मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को निर्धारित की गयी है. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सरकार के जवाब पर प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए समय दिया है.
