Ranchi News : हमारी व्यवस्था बचाने के लिए पुरखों ने दी कुर्बानियां : गीताश्री

अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के तत्वावधान में शनिवार को आदिवासी दिवस पर पदयात्रा और सभा की गयी.

आदिवासी दिवस पर पदयात्रा और सभा, संघर्ष को बताया एकमात्र रास्ता

अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद ने निकाली पदयात्रा

रांची. अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के तत्वावधान में शनिवार को आदिवासी दिवस पर पदयात्रा और सभा की गयी. परिषद की अध्यक्ष व पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव के नेतृत्व में पदयात्रा सिरमटोली सरना स्थल से शुरू होकर क्लब रोड, सुजाता चौक, मेन रोड होते हुए अलबर्ट एक्का चौक पहुंची. अलबर्ट एक्का की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद पदयात्रा पुनः सिरमटोली सरना स्थल लौटी. इस दौरान दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. गीताश्री उरांव ने कहा कि हमारे पुरखों ने जंगलों की रक्षा की, गांव बसाए और एक व्यवस्था स्थापित की, जिसकी रक्षा के लिए उन्होंने अपने प्राण न्योछावर कर दिये. अंग्रेजी शासन में, जिसे ‘सूर्य कभी न डूबने वाला साम्राज्य’ कहा जाता था, हमारे पुरखों के सामने घुटने टेकने पड़े. परिणामस्वरूप आदिवासी जमीनों की रक्षा के लिए सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट और विलकिंसन रूल जैसे विशेष कानून बने.

आदिवासी जनपरिषद के प्रेमशाही मुंडा ने कहा कि आज आदिवासियों की स्थिति गंभीर है. पेसा कानून लागू नहीं है, जमीनें बच नहीं पा रही हैं और संवैधानिक अधिकार छीने जा रहे हैं. ऐसी हालात में संघर्ष ही एकमात्र विकल्प है. पवन तिर्की ने कहा कि आज का दिन अधिकार दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. लेकिन, महापुरुषों के नाम पर नारे लगाने भर से काम नहीं चलेगा, हमें उनके बताये मार्ग पर चलना होगा. तेतरी उरांव ने आग्रह किया कि इस तरह के कार्यक्रमों में बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित की जाये ताकि वे अपने संवैधानिक अधिकारों को समझ सकें. भीम तिर्की, सविता कच्छप समेत अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे.

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By Munna kumar singh

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