64 माह में पॉक्सो के झारखंड में 7911 केस दर्ज, 6620 मामले हैं लंबित

दो माह में केस निपटाने का सख्त निर्देश, फिर भी स्थिति बदतर

रांची (प्रणव). झारखंड में पॉक्सो एक्ट (बच्चों के खिलाफ यौन हमला, दुष्कर्म व पोर्नोग्राफी जैसे मामले) के तहत दर्ज केस के अनुसंधान में झारखंड पुलिस की स्थिति बदतर है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जनवरी 2018 से 13 मई 2024 तक राज्य के 24 जिलों व दो रेल जिलों में पाॅक्सो एक्ट के कुल 7911 केस दर्ज किये गये. इस दौरान सिर्फ 1291 मामलों की ही जांच पूरी की जा सकी. जबकि 6620 मामले अब भी लंबित है. यह स्थिति तब है जब पॉक्सो एक्ट के मामलों का निपटारा दो माह में करने का आदेश विभाग के वरीय अधिकारियों ने दिया है. पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों का हाइकोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कम पोक्सो कमेटी समीक्षा करती है. सुप्रीम कोर्ट का भी पॉक्सो एक्ट के मामले में निर्देश है. सीआइडी डीजी अनुराग गुप्ता ने मामले में प्रक्षेत्र आइजी, डीआइजी, एसएसपी व एसपी को लिखे पत्र में कहा है कि पॉक्सो एक्ट के 7911 मामलों में से 6620 मामले लंबित रहना अप्रत्याशित है. जबकि पूर्व में मेरे द्वारा सख्त निर्देश दिया गया था कि पॉक्सो एक्ट का त्वरित अनुसंधान और निष्पादन किया जाये. लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि आदेश का अनुपालन जिला स्तर पर नहीं किया जा रहा है. प्रक्षेत्रीय आइजी और रेंज डीआइजी भी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. जबकि हाइकोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कम पोक्सो कमेटी द्वारा दिये गये निर्देशों को 19 अप्रैल 2023 को सभी रेंज डीआइजी को भेजा गया था. धनबाद, रांची, बोकारो, गिरिडीह व हजारीबाग में सबसे ज्यादा मामले लंबित : पॉक्सो एक्ट के तहत विभिन्न जिलों में दर्ज मामलों पर गौर करें, तो सबसे ज्यादा धनबाद, रांची, बोकारो, गिरिडीह व हजारीबाग में 400 से 680 तक केस लंबित हैं. जबकि अन्य जिलों की स्थिति भी ठीक नहीं है. 24 में से एक भी जिला ऐसा नहीं है, जिसने 50 फीसदी मामलों का निपटारा किया हो.

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By Prabhat Khabar News Desk

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