राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति अायोग के अध्यक्ष नंदकुमार साय ने कहा : लोग हमें बला मानते हैं
रांची : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति (एसटी) अायोग के अध्यक्ष नंदकुमार साय ने कहा है कि हम अपने अधिकार व कार्य की व्याख्या के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की सोच रहे हैं. प्रभात खबर से बातचीत के दौरान यह पूछे जाने पर कि सरकार व इसके विभिन्न विभाग आयोग के आदेश-निर्देश को अक्सर बहुत गंभीरता से नहीं लेते, श्री साय ने यह कहा. उन्होंने कहा कि अभी जिनकी बात (सरकार के विभिन्न कार्यालय) हो रही है, वैसे लोग हमें बला मानते हैं.
इधर हमारे आयोग में मानव संसाधन सहित अन्य संसाधन की कमी है. राष्ट्रीय कार्यालय से लेकर हमारे क्षेत्रीय कार्यालय भी संसाधनहीन हैं. ऐसे में हमें अपने कामकाज में मुश्किल होती है. अध्यक्ष ने कहा कि हमारे पास आदेश-निर्देश के अनुपालन के दौरान संबंधित पक्ष को समन करने तथा वारंट जारी करने का अधिकार है.
पर हमारा मकसद इससे ज्यादा अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को उनका अधिकार दिलाना है. हम चाहते हैं कि सख्ती न सही विधि की सहायता से यह काम हो. अभी जिनकी बात (सरकार के विभिन्न कार्यालय) हो रही है, वैसे लोग हमें बला मानते हैं. इससे पहले एसटी समुदाय पर अत्याचार व प्रताड़ना के संबंध में अध्यक्ष ने कहा कि यह सच है कि देश भर में ऐसा हो रहा है. यह होना नहीं चाहिए. यह राज्यों पर ज्यादा निर्भर है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर नये सिरे से सक्रिय होने की जरूरत है.
झारखंड में पत्थलगड़ी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ में भी संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारों संबंधी तथा गांव के सीमांकन के लिए पत्थलगड़ी होती है. पर झारखंड में इसका स्वरूप क्या है, मुझे इसकी जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण घटना है.
लोगों ने ज्ञापन दिया : सर्किट हाउस में एसटी समुदाय के विभिन्न लोगों व संगठनों ने आयोग के अध्यक्ष नंदकुमार साय को अपनी समस्याअों से संबंधित ज्ञापन दिया. पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने भी घाटोटांड़ के कुछ रैयतों की समस्याअों को लेकर श्री साय से मुलाकत की तथा उन्हें ज्ञापन सौंपा.
जनजातीय धुन में ऋग्वेद की ऋचाओं का पाठ
रांची : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष डॉ नंद कुमार साय शनिवार को भुसूर, लालखटंगा स्थित ‘आशा’ (एसोसिएशन फॉर सोशल एंड ह्यूमन अवेयरनेस) पहुंचे. बाल आश्रम में ईंट भट्ठों में कार्यरत मजदूरों के बच्चे, छुड़ा कर लाये गये बच्चे, सड़कों पर भटकते मिले बच्चों से मुलाकात की और उनके साथ लगभग तीन घंटे का वक्त बिताया. उन्होंने बच्चों का सामूहिक जन्मदिन भी मनाया. उन्हें जनजातीय धुन में ऋगवेद की ऋचाएं भी सुनायीं. उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों की देखभाल करना, उनके आचरण-व्यवहार में सुधार लाना पुनीत कार्य है. बच्चों को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश को ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सामर्थ्यवान बनें. इस अवसर पर बच्चों ने आय गेलक हमर मंझे, जोहार रउरे के हरा भरा राइज में, हरियरा दिसेला हमर झारखंड रइज सहित कई गीतों पर पारंपरिक नृत्य पेश किया.
कलशा नृत्य भी दिखाया. कार्यक्रम प्रस्तुत करनेवालों में रीना, सीमा, उर्मिला, बिरसमुनी, जयंती, अर्चना, रोशनी, सोमारी व अन्य शामिल थे. इससे पूर्व आशा संस्था के सचिव अजय कुमार जायसवाल ने संस्था के कार्यों के बारे में बताया. संस्था की अध्यक्ष पूनम टोप्पो ने कार्यक्रम का संचालन किया. कार्यक्रम में अध्यक्ष के आप्त सचिव वीरेंद्र जयसवाल, निज सचिव राहुल मिश्रा, मीनाक्षी शर्मा, लाइफ सेवर्स के अतुल गेरा, ज्ञान प्रकाश, राजेश राज, विक्रम उरांव, मानिक चंद्र मंडल व अन्य मौजूद थे.
