हम जिंदा हैं, तो नजर आना भी जरूरी है
रांची : सीएए के खिलाफ कडरू स्थित हज हाउस के समीप 12वें दिन भी अनिश्चितकालीन धरना जारी रहा. धरना को केडी सिंह, राजू आइंद, जामिया की छात्रा निखत अफरोज, सुमैना सोहेल, एमजेड खान, सामाजिक कार्यकर्ता आकाश, महेंद्र पीटर, अनिल अंशुमन, प्रकाश विप्लव ने संबाेधित किया. कहा कि सरकार को हर हाल में सीएए को वापस लेना होगा. शकीला बानो ने कहा कि कैसे सरकार एनपीआर लाकर एनआरसी लाना चाहती है. आज हमारे देश में कइयों के पास कोई कागज नहीं है, जिन्हें विदेशी घोषित करने की साजिश की जा रही है.
रजिया बानो ने असम में चल रहे डिटेंशन सेंटर का हाल बताया. वहां का हाल सुन कर धरने पर बैठी महिलाओं की आंखें नम हो गयीं. रेणु देवी ने कहा कि यह कानून हिंदुस्तान के लिए शर्मिंदगी की बात है. उन्होंने इस आंदोलन में सभी महिलाअों से शामिल होने का आग्रह किया. धरना में शामिल होने के लिए काफी संख्या में ग्रामीण इलाकों से महिलाएं आयी थीं.
महिलाओं ने उन्हें सीएए, एनआरसी, एनपीआर के बारे में जानकारी दी अौर उनसे होनेवाली परेशानी से अवगत कराया. नोशी बेगम ने कहा कि जब उसूल पर चोट आये, तो टकराना जरूरी है. अगर हम जिंदा हैं, तो जिंदा नजर आना भी जरूरी है. धरना में मंजू दीदी, एम नाज, रुखसाना परवीन, साजिया खातून, मंतशा नाज, नेहा परवीन, कुंती देवी, फूलमनी देवी, गीता देवी, जर्मन होरो, ललिता देवी सहित अन्य महिलाएं उपस्थित थीं. शनिवार को महिलाएं सीएए से संबंधित पर्ची हर आने-जानेवाले को देंगी.
सीएए और एनआरसी के विरोध में उड़ाये काले बैलून
शुक्रवार को जुमा के नमाज के बाद मेन रोड के एकरा मस्जिद के बाहर सीएए और एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन किया गया़ प्रदर्शनकारियों ने काले बैलून उड़ाये व दौरान सीएए व एनआरसी के विरोध में नारेबाजी की.
