बेड़ो : स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी के साथ कदम से कदम मिला कर चलनेवाले टाना भगत आज भी गांधीवादी विचारधारा एवं जीवनशैली को अपना रहे हैं. सादगी से जीवन जीते हैं और निरामिस भोजन करते हैं.
इनकी जीवनशैली की एक अलग पहचान है़ पूर्व विधायक गंगा टाना भगत बताते हैं कि आज भी झारखंड के लगभग 20 हजार टाना भगत बापू के बताये मार्ग सत्य, अहिंसा व स्वच्छता को अक्षरश: पालन करते आ रहे हैं. टाना भगत अपनी मांगों के लिए सत्याग्रह के मार्ग पर ही चलते हैं. कभी सरकारी या गैरसरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. श्री भगत कहते हैं कि टाना भगत खादी पहनते हैं. वर्तमान में खादी वस्त्र महंगा होने के कारण कुछ लोग ही पहन पा रहे हैं. युवा सफेद व अन्य वस्त्र पहनते हैं.
वहीं, बहुसंख्यक टाना भगत स्नान के बाद अपने द्वारा बनाया गया सादा खाना ही खाते हैं. घर की दो से तीन बार सफाई करते हैं. श्री भगत बताते हैं कि स्वतंत्रता की लड़ाई में टाना भगतों की अंग्रेजों द्वारा नीलाम की गयी जमीन आज भी उन्हें नहीं मिली है. वहीं, 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा भूमिहीन टाना भगतों को दी गयी जमीन पर आज तक दखलदिहानी नहीं मिली है. कल्याण विभाग द्वारा संचालित टाना भगत आवासीय विद्यालयों में सिर्फ लगभग 10% ही टाना भगत के बच्चे पढ़ते हैं. गंगा टाना भगत कहते हैं कि सरकार ने टाना भगतों के लिए कई योजनाएं चला रखी हैं, लेकिन इनमें कुछ खामियां भी हैं.
फोटो के लिए नहीं, सफाई के लिए झाड़ू पकड़ें
रांची : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता को स्वच्छता अभियान से जोड़ कर एक संदेश दिया था. लगा था कि इससे साफ-सफाई व स्वच्छता को भरपूर बढ़ावा मिलेगा. पर लगता है बापू के चश्मे से भी इस अभियान को साफ दृष्टि नहीं मिली. खास कर राजनीतिज्ञों व ब्यूरोक्रेट्स (अपवाद छोड़ कर) ने जब भी झाड़ू थामा, यह मजाक बन कर रह गया. देश भर के छोटे-बड़े शहरों से लेकर राजधानी तक में जब सिर्फ फोटो खिंचवाना मकसद हो जाये, तो स्वच्छता को बढ़ावा कैसे मिले? सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सर्वोच्च पद पर बैठे लोगों ने भी एेसा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. नतीजा सामने है.
अभियान के दिनों में, जब असली सफाई, सफाईकर्मियों से करायी गयी. वहां अब गंदगी पसरी रहती है. दरअसल साफ-सफाई एक अनुशासन है. दीपाटोली सहित अन्य सैन्य छावनियों में यह अनुशासन देखा जा सकता है. दूसरी अोर, रातू रोड की साईं विहार व कृष्णा नगर कॉलोनी और अशोक नगर सहित हेरिटेज गार्डेन, जैसे शहर के कई मुहल्लों में भी लोग साफ-सफाई के प्रति सजग हैं.
स्वच्छता को लेकर जागरूक नहीं हैं लोग
स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा हर वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण का आयोजन पूरे देश में किया जाता है. जिस शहर की सफाई व्यवस्था सबसे बेहतर होती है, केंद्र सरकार ऐसे नगर निकायों को पुरस्कृत करती है. लेकिन इस सर्वेक्षण का भी बहुत असर राजधानी में देखने को नहीं मिल रहा है. आज भी शहर के लोग खुलेआम नालियों में या घर के आसपास किसी खाली प्लॉट में कूड़ा फेंकते हैं. शहर में सिंगल यूज पॉलिथीन का भी उपयाेग धड़ल्ले से हो रहा है. नियमित सफाई नहीं हाेने और कचरावाली गाड़ी हर दिन नहीं आने के कारण अलग-अलग मुहल्लों की स्थिति नारकीय बनी हुई है. स्थिति यह है कि घर का कचरा डिब्बा भर जाने के कारण लोग मजबूरन खाली जगहों पर कचरा फेंक देते हैं. इससे मुहल्लों की स्थिति खराब हो जाती है. शहर के कई प्रमुख सड़कों पर भी कचरा फैला देखा जा सकता है.
