कोडरमा सदर अस्पताल में सामने आया मरीज के इलाज में लापरवाही का मामला
रांची : सीएम हेमंत सोरेन ने कहा है कि राज्य सरकार के कामकाज में टाल-मटोल का रवैया अब बर्दाश्त नहीं होगा. उन्होंने कोडरमा सदर अस्पताल में बिहार के एक अनाथ मरीज के इलाज में लापरवाही बरतने और फिर बिना समुचित इलाज के ही रिम्स रेफर कर दिये जाने के मामले पर नाराजगी भी जतायी है. मुख्यमंत्री को ट्वीट कर जानकारी दी गयी कि बिहार के एकंगरसराय निवासी 60 वर्षीय शत्रुघ्न साव की सड़क दुघर्टना में बायें पैर के जांघ की हड्डी टूट गयी थी.
हादसे के बाद उन्हें सदर अस्पताल कोडरमा में इलाज के लिए भर्ती किया गया था. लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा उनके बेहतर इलाज को प्राथमिकता न देकर उनके परिजनों की प्रतीक्षा करता रहा. मुख्यमंत्री ने इस घटना पर नाराजगी प्रकट करते हुए राज्य के सभी अस्पतालों में मरीजों के साथ संवेदनशीलता के साथ इलाज करने का निर्देश दिया.
उन्होंने कहा कि अज्ञात मामलों में परिजन का पता लगा कर संपर्क करना पुलिस का दायित्व है और डॉक्टर हर मरीज के बेहतर से बेहतर इलाज पर ही अपना ध्यान दें. मुख्यमंत्री ने रिम्स में इलाजरत शत्रुघ्न साव का बेहतर इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश रिम्स प्रबंधन को दिया है. मुख्यमंत्री ने रांची के उपायुक्त को मरीज के इलाज के बाद बिहार स्थित उनके पैतृक निवास भेजने का प्रबंध करने को कहा है.
मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा है कि यही रवैया रहा है पिछले कुछ सालों से. जिम्मेदारी लेकर समस्या को हल करने की जगह हर अधिकारी उसे आगे बढ़ा अपना पल्ला झाड़ लेना चाहता है. यह वाकई दुखद है. पर स्थिति अब बदलेगी. टाल-मटोल का रवैया अब बर्दाश्त नहीं होगा.
रांची. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने समस्त झारखंडवासियों को मकर संक्रांति, पोंगल, टुसू पर्व, माघ बिहु की शुभकामनाएं दी.मुख्यमंत्री ने कहा एक पर्व के कई नाम हो सकते हैं. पर्व मनाने की अलग-अलग परंपरा हो सकती है, लेकिन सभी में उत्सवधर्मिता, प्रकृति की उपासना और सौहार्द्र का भाव एक समान व्याप्त होता है.
सीएम के निर्देश पर राजस्व उगाही के प्रयास शुरू
महाधिवक्ता ने खान व भूतत्व विभाग के अधिकारियों के साथ की बैठक
सीसीएल, बीसीसीएल, इसीएल, सेल व डीवीसी से संबंधित 200 मामलों में फंसी हुई है सरकार की 33,000 करोड़ रुपये की राशि
रांची. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व मुख्य सचिव डीके तिवारी के दिशा-निर्देश के आलोक में सरकार द्वारा राजस्व उगाही के लिए प्रयास शुरू कर दिया गया है. मुख्यमंत्री से मिले निर्देश पर महाधिवक्ता अजीत कुमार ने मंगलवार को खान व भूतत्व विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर कोल ट्रिब्यूनल के स्थगनादेश से संबंधित पूरी जानकारी देने को कहा. साथ ही ट्रिब्यूनल के स्थगनादेशों को हटाने के लिए अतिशीघ्र सभी जरूरी कदम उठाने को कहा. महाधिवक्ता को बताया गया कि स्थगनादेशों के कारण लगभग 33,000 करोड़ रुपये की राशि सरकार की फंसी हुई है. यह राशि सीसीएल, बीसीसीएल, इसीएल, सेल व डीवीसी से वसूला जाना है. इनसे संबंधित लगभग 200 मामले कोल ट्रिब्यूनल नयी दिल्ली में लंबित है, जिसमें लगभग 33000 करोड़ की सरकार की मांग पर स्थगनादेश पारित है.
राज्य सरकार द्वारा एमएमडीआर एक्ट की धारा 21(5) के अंतर्गत सीसीएल, बीसीसीएल, इसीएल, सेल व डीवीसी से राशि की मांग गयी थी. उपरोक्त मामलों में कोल ट्रिब्यूनल द्वारा संपूर्ण राशि पर स्थगनादेश पारित किये जाने के कारण राज्य सरकार परेशानी में है. महाधिवक्ता ने निर्देश दिया कि सभी 200 मामलों से संबंधित संचिकाएं उप स्थापित की जाये तथा कोल ट्रिब्यूनल में स्थगन आदेश को समाप्त किये जाने को लेकर आइए पिटीशन दायर करने के लिए तथ्य विवरणी तैयार कर तीन दिनों के अंदर पूरी कार्रवाई की जाये.
उपरोक्त मामले राज्य के विभिन्न जिलों से संबंधित है, इसलिए सभी कार्यालयों से सूचनाएं एकत्रित करें. खान व भूतत्व विभाग द्वारा संपूर्ण सूचनाएं, तथ्य विवरणी, पिटीशन की प्रतियां आदि प्राप्त होने के बाद महाधिवक्ता स्वयं ट्रिब्यूनल में उपस्थित हो कर सरकार का पक्ष रखेंगे. कहा गया कि यदि ट्रिब्यूनल में आैर विलंब होता है, तो यथोचित न्याय पीठ के समक्ष सरकार की अोर से आवेदन दायर करते हुए राशि की उगाही के लिए उचित आदेश प्राप्त करने का प्रयास किया जायेगा.
