रांची : हाइकोर्ट में इनपुट टैक्स क्रेडिट मामले में दायर याचिकाअों पर तीन दिनों तक चली बहस के बाद बुधवार को सुनवाई पूरी हो गयी. जस्टिस एचसी मिश्र व जस्टिस दीपक राैशन की खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया.
प्रार्थियों की अोर से वरीय अधिवक्ता वीरेन पोद्दार व अधिवक्ता सुमित गड़ोदिया ने बताया कि वैट एक्ट की धारा-18(4)टू को असंवैधानिक व फरवरी 2017 में बनायी गयी नियमावली को वर्ष 2015 से लागू करने को गैर कानूनी घोषित किया जाना चाहिए. वैट एक्ट की धारा-94 के तहत सरकार को पूर्व की तिथि से कोई नियमावली बना कर लागू करने का अधिकार नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अंतर्गत वैसी नियमावली को मान्यता नहीं दी जा सकती है.
उन्होंने नियमावली को पूर्व की तिथि से लागू करने के कारण उसे गैरकानूनी घोषित करने का आग्रह किया. उन्होंने यह भी बताया कि किसी वस्तु के संबंध में एक बार जो लाभ वादियों को दिया जा चुका है, उसे बाद में बनायी गयी नियमावली से जब्त नहीं किया जा सकता है. वहीं सरकार की अोर से महाधिवक्ता अजीत कुमार ने पक्ष रखते हुए प्रार्थियों की दलील का विरोध किया.
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि यदि मूल कानून सितंबर 2015 से लागू किये गये थे, तो सिर्फ इस कारण से की नियमावली विलंब से बनायी गयी आैर उसे पूर्व तिथि अथवा कानून लागू होने की तिथि से लागू किया गया, तो उसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता है.
