श्रेयस सरदेसाई
रिसर्च एसोसिएट, लोकनीति-सीएसडीएस
अमित कुमार
मानव विकास संस्थान, पूर्वी क्षेत्रीय केंद्र, रांची
जैसा इस शृंखला की एक पूर्व कड़ी में संकेत किया जा चुका है, रघुवर दास सरकार के प्रति ज्यादा मतदाताओं (55 प्रतिशत) में असंतोष की प्राथमिक वजह आर्थिक थी, जो उसकी चुनावी हार के मुख्य कारणों में एक रही. 27 विधान सभा क्षेत्रों में 2,700 मतदाताओं पर किये गये इस सर्वेक्षण ने राज्य सरकार से मोहभंग के जो तीन सबसे बड़े मुद्दे पाये, वे मूल्यवृद्धि, बेरोजगारी एवं भ्रष्टाचार हैं. जब उत्तरदाताओं से यह सीधा सवाल किया गया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ी या घटी हैं, तो प्रत्येक पांच में चार मतदाताओं (81 प्रतिशत) ने कहा कि वे या तो बढ़ी हैं अथवा पहले जितनी ही ऊंची हैं.
केवल 16 प्रतिशत का विचार इसके विपरीत था. यह भावना न सिर्फ निम्नतर वर्गों एवं निर्धन मतदाताओं में, बल्कि धनाढ्य तथा मध्य वर्ग के मतदाताओं में भी उतनी ही बलवती पायी गयी. ऐन चुनावों के वक्त मूल्यों, खासकर सब्जियों एवं अन्य खाद्य वस्तुओं (जो केवल झारखंड की ही समस्या नहीं है) की महंगाई भाजपा को भी महंगी पड़ गयी.
बेरोजगारी के सवाल पर आधे से अधिक (55 प्रतिशत) उत्तरदाताओं का यह विचार था कि राज्य में रोजगार के अवसर या तो घटे हैं अथवा पहले जितने ही निम्न हैं. 18-25 वर्ष के सबसे युवा मतदाता इस सवाल पर खास तौर से मुखर थे, जिनमें 61 प्रतिशत ने कहा कि झारखंड में रोजगार की स्थिति पिछले पांच वर्षों में बदतर ही हुई है. जो मतदाता जितने ही युवा थे, उन्होंने इस स्थिति में उतनी ही ज्यादा गिरावट जतायी.
उनमें भी कॉलेज-शिक्षित तथा दसवीं उत्तीर्ण युवा इस मुद्दे से अधिक विचलित थे. राज्य के उत्तरी, पश्चिमी तथा दक्षिणी हिस्सों के मतदाता रोजगार की स्थिति को लेकर सर्वाधिक निराश पाये गये.
जहां तक पेशेवर वर्गों की बात है, कुशल एवं अर्ध-कुशल कामगारों में यह विचार अधिक प्रबल था कि पिछले पांच वर्षों के दौरान झारखंड में रोजगार पाना कठिन हो गया है. एक अलग प्रश्न के द्वारा मतदाताओं से यह भी पूछा गया कि पिछले पांच वर्षों की अवधि में झारखंड में नये उद्योगों की तादाद में बढ़ोतरी हुई है अथवा कमी आयी है. इसके उत्त्तर में राज्य के उत्तरी क्षेत्रों को छोड़कर शेष सभी हिस्सों के उत्तरदाताओं में आधे से अधिक का मत यह था कि उसमें कमी ही आयी है.
भ्रष्टाचार के मोर्चे पर भी सरकार के काम-काज का मूल्यांकन घटिया पाया गया, क्योंकि प्रत्येक पांच में तीन मतदाताओं (59 प्रतिशत) का विचार था कि भ्रष्टाचार में वृद्धि ही हुई है. ऐसे विचारवाले मतदाताओं में निर्धन वर्ग एवं राज्य के दक्षिणी हिस्से के लोगों की तादाद ज्यादा रही.
पर ऐसा भी नहीं था कि राज्य सरकार सभी आकलनों पर नकारात्मक ही उतरी. मूल्यवृद्धि, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को छोड़कर अधिकतर अन्य मुद्दों पर राज्य सरकार का मूल्यांकन या तो काफी सकारात्मक (बिजली आपूर्ति, सड़कें, नक्सल हिंसा पर नियंत्रण) अथवा ज्यादा बुरा नहीं (उद्योगों की स्थापना, अस्पतालों, स्कूलों एवं पेयजल सुविधाओं की स्थिति) मिला.
पूरे राज्य में औसतन प्रत्येक तीन मतदाताओं में दो और राज्य के दक्षिणी हिस्से में तो प्रत्येक चार में तीन का यह विचार था कि पिछले पांच वर्षों में सड़कों की स्थिति में सुधार आया है. 59 प्रतिशत मतदाता इस विचार के थे कि बिजली आपूर्ति सुधरी है, जबकि राज्य के उत्तर-पश्चिमी भाग के मतदाता उसकी स्थिति से बहुत ही संतुष्ट दिखे.
पेयजल की स्थिति पर मतदाताता बीच से बंटे मिले. जहां 49 प्रतिशत इस विचार के रहे कि यह सुधरी है, वहीं 49 प्रतिशत का ही मत यह था कि इसमें गिरावट ही आई है.
दक्षिणी झारखंड इसकी स्थिति से काफी असंतुष्ट मिला, जबकि उत्तर-पश्चिमी हिस्सा उतना ही संतुष्ट. सरकारी अस्पतालों की स्थिति को लेकर भी लोगों के विचार उतने ही विभाजित पाये गये – जहां 48 प्रतिशत ने यह माना कि वे सुधरे हैं, वहीं 51 प्रतिशत इस विचार के मिले कि उनकी स्थिति बिगड़ी है. उत्तरी एवं उत्तर पश्चिमी झारखंड के मतदाताओं को सरकारी अस्पतालों की स्थिति से नाखुशी थी. सरकारी स्कूलों के बारे में तो राज्य के सभी हिस्सों और खासकर उत्तर-पश्चिमी एवं दक्षिणी भागों के मतदाताओं का मत था कि वे और भी बदतर ही हुए हैं. इन सबके बावजूद, ये आकलन आर्थिक मुद्दों, विशेषकर आजीविका और रोजी-रोटी से संबद्ध मूल्यांकन जितने बुरे नहीं ठहरे.
मतदाताओं से यह भी पूछा गया कि राज्य सरकार किसानों, व्यवसायियों, युवाओं एवं महिलाओं के हितों की देखरेख में सफल रही या नहीं. जहां किसानों और व्यवसायियों में इसे लेकर बहुत संतुष्टि दिखी, वहीं महिलाएं और युवा अत्यंत ही असंतुष्ट मिले. 18-25 वर्ष आयुवर्ग के तो 58 प्रतिशत मतदाताओं ने अपनी असंतुष्टि जतायी, जिसकी एक वजह बेरोजगारी हो सकती है.
पर ये महिलाएं ही थीं, जो अपनी असंतुष्टि की अभिव्यक्ति में सबसे मुखर रहीं, क्योंकि उनमें 62 प्रतिशत ने ऐसे ही विचार प्रकट किये. इस हिसाब से संभावना यह बनती है कि रघुवर सरकार को पुरुषों एवं उम्रदराजों की अपेक्षा महिलाओं और युवाओं के मत कम मिले होंगे.
विभिन्न जातियों एवं समुदायों में भी सरकार से नाराजगी मिली. मतदाताओं से यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार उनके हितों की देखभाल में कामयाब रही, यादव एवं अत्यंत पिछड़ी जातियों को छोड़कर लगभग सभी अन्य जातियों, जनजातियों और समुदायों के मतदाताओं में असंतोष ही देखा गया.
खासकर, मुस्लिमों, संथालों एवं उरांवों में यह अप्रसन्नता सबसे अधिक जाहिर थी. दिलचस्प तथ्य यह रहा कि जहां बहुत-से मुस्लिम और उरांव मतदाताओं ने अपने मत भाजपा को नहीं दिये, वहीं मुंडा, कुर्मियों तथा अगड़ी जातियों में बहुतों ने सरकार से अपने हितों की अनदेखी से नाराजगी के बावजूद उसे अच्छे अनुपात में मतों से नवाजा.
दूसरी ओर, यादव मतदाताओं ने अपने हितों की देखरेख को लेकर सरकार से संतुष्टि के बाद भी, उसे ज्यादा मत नहीं दिये. इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि विभिन्न जातियों एवं समुदायों ने अपने हितों की देखभाल के संबंध में सरकार से अपनी खुशी अथवा नाराजगी के बावजूद, अपने मत अपनी पारंपरिक राजनीतिक निष्ठा के अनुसार ही दिये. इसके बाद भी, महागठबंधन को भाजपा के मूलभूत समर्थकों के बीच मामूली मगर सार्थक लाभ तो मिल ही गया.
कई जातियों और समुदायों के बीच नाराजगी का कारण सरकार द्वारा उनके हितों की अनदेखी रही
ऊंची जाति 33 54 13
यादव 50 41 9
कुर्मी 40 45 14
अन्य ओबीसी 47 42 11
चमार/ जाटव 39 54 7
अन्य एससी 40 54 7
उरांव 35 61 4
संथाल 34 64 2
मुंडा 42 51 6
अन्य एसटी 46 44 10
मुसलमान 19 72 8
अन्य 44 49 7
नोट – संख्याएं प्रतिशत हैं और पूर्णांकन के कारण ये कुल सौ नहीं हो सकते. मसलन, कोई प्रतिशत यदि 5.8 है, तो उसे 6 लिखा गया है, मगर उसकी वजह से उस टेबल के सभी परसेंट का जोड़ 100 नहीं होकर उससे एक या दो कम-ज्यादा हो जायेगा.
पूछा गया सवाल- झारखंड सरकार आपकी जाति और समुदाय के हितों की रक्षा करने में सफल रही है या विफल रही है?
समाज के विभिन्न वर्गों की चिंताओं से निबटने को लेकर पिछली सरकार का मतदाताओं द्वारा मूल्यांकन
किसानों के हितों से निबटने में
किसान 54 45 1
संपूर्ण 52 44 4
व्यापारियों के हितों से निबटने में
व्यापारी 58 39 4
संपूर्ण 57 37 6
युवाओं के हितों से निबटने में
25 वर्ष तक 39 58 3
26 से 35 वर्ष 40 55 5
36 से 45 वर्ष 38 56 6
46 से 55 वर्ष 41 54 5
56 वर्ष से ऊपर 36 52 13
संपूर्ण 39 55 6
महिलाओं के हितों से निबटने में
पुरुष 33 62 5
महिला 33 62 4
संपूर्ण 33 62 5
नोट – संख्याएं प्रतिशत हैं और पूर्णांकन के कारण ये कुल सौ नहीं हो सकते. मसलन, कोई प्रतिशत यदि 5.8 है, तो उसे 6 लिखा गया है, मगर उसकी वजह से उस टेबल के सभी परसेंट का जोड़ 100 नहीं होकर उससे एक या दो कम-ज्यादा हो जायेगा.
वििभन्न क्षेत्रों के वोटरों द्वारा रघुवर सरकार के शासन का मूल्यांकन
सरकारी स्कूल
उत्तर 49 50 1
उत्तर पश्चिम 41 58 1
संथाल परगना 46 51 3
दक्षिण 42 55 3
सरकारी अस्पताल
उत्तर 43 56 0
उत्तर पश्चिम 45 55
संथाल परगना 54 45 1
दक्षिण 51 48 1
सड़कें
उत्तर 52 48 0
उत्तर पश्चिम 71 29
संथाल परगना 59 40 0
दक्षिण 77 22 1
बिजली
उत्तर 59 40 0
उत्तर पश्चिम 68 31 1
संथाल परगना 60 40 1
दक्षिण 55 43 1
नये उद्योग
उत्तर 46 44 11
उत्तर पश्चिम 38 35 27
संथाल परगना 38 45 17
दक्षिण 42 46 12
पेयजल सुविधाएं
उत्तर 48 49 3
उत्तर पश्चिम 58 42 –
संथाल परगना 49 48 4
दक्षिण 45 52 3
नोट – संख्याएं प्रतिशत हैं और पूर्णांकन के कारण ये कुल सौ नहीं हो सकते. मसलन, कोई प्रतिशत यदि 5.8 है, तो उसे 6 लिखा गया है, मगर उसकी वजह से उस टेबल के सभी परसेंट का जोड़ 100 नहीं होकर उससे एक या दो कम-ज्यादा हो जायेगा.
रोजगार, मूल्य वृद्धि और भ्रष्टाचार के मोर्चे पर सरकार का आकलन रहा खराब
नये उद्योग 42 44 14
भ्रष्टाचार 59 36 5
मुद्रास्फीति 81 16 3
रोजगार 36 55 9
नोट – संख्याएं प्रतिशत हैं
पूछा गया सवाल- ये चीजें पिछले पांच सालों में बढ़ी हैं या घटी हैं?
गरीबों की तरह ही अमीरों ने भी कीमतों में वृद्धि की बात कही
गरीब 80 15 5
निम्न वर्ग 83 15 2
मध्य वर्ग 80 17 3
अमीर 78 17 5
नोट – संख्याएं प्रतिशत हैं और पूर्णांकन के कारण ये कुल सौ नहीं हो सकते. मसलन, कोई प्रतिशत यदि 5.8 है, तो उसे 6 लिखा गया है, मगर उसकी वजह से उस टेबल के सभी परसेंट का जोड़ 100 नहीं होकर उससे एक या दो कम-ज्यादा हो जायेगा.
रोजगार अवसरों की कमी को
युवाओं ने दिया महत्व
25 वर्ष तक 33 61 6
26 से 35 वर्ष 37 54 9
36 से 45 वर्ष 36 55 9
46 से 55 वर्ष 39 53 8
56 वर्ष से ऊपर 35 50 15
भ्रष्टाचार द्वारा
पेशेवर (वकील,
डॉक्टर, शिक्षक) 43 54 3
सरकारी नौकरी 46 44 11
व्यापारी 44 51 5
सेवा कर्मचारी 57 43
कुशल श्रमिक 30 59 11
अर्ध या अकुशल
श्रमिक 32 63 5
कृषि क्षेत्र 36 61 3
अन्य व्यवसाय 42 42 15
छात्र 33 61 6
गृहिणी 33 52 15
बेरोजगार 33 59 8
क्षेत्रों द्वारा
उत्तर 44 50 6
उत्तर पश्चिम 33 60 6
संथाल परगना 38 49 13
दक्षिण 30 59 11
नोट – संख्याएं प्रतिशत हैं और पूर्णांकन के कारण ये कुल सौ नहीं हो सकते. मसलन, कोई प्रतिशत यदि 5.8 है, तो उसे 6 लिखा गया है, मगर उसकी वजह से उस टेबल के सभी परसेंट का जोड़ 100 नहीं होकर उससे एक या दो कम-ज्यादा हो जायेगा.
राज्य के ज्यादातर क्षेत्रों में, अधिकांश मतदाताओं ने महसूस किया कि पिछले पांच वर्षों में राज्य में उद्योगों की स्थापना कम हुई
उत्तर 46 44 11
उत्तर पश्चिम 38 35 27
संथाल परगना 38 45 17
दक्षिण 42 46 12
नोट – संख्याएं प्रतिशत हैं और पूर्णांकन के कारण ये कुल सौ नहीं हो सकते. मसलन, कोई प्रतिशत यदि 5.8 है, तो उसे 6 लिखा गया है, मगर उसकी वजह से उस टेबल के सभी परसेंट का जोड़ 100 नहीं होकर उससे एक या दो कम-ज्यादा हो जायेगा.
पिछले पांच साल में राज्य में भ्रष्टाचार पर राय : वर्ग और क्षेत्र के आधार पर
आर्थिक वर्ग द्वारा
गरीब 61 30 9
निम्न वर्ग 62 35 3
मध्य वर्ग 56 37 7
अमीर 55 40 5
क्षेत्रों द्वारा
उत्तर 59 37 4
उत्तर पश्चिम 54 41 5
संथाल परगना 52 42 6
दक्षिण 63 29 7
नोट – संख्याएं प्रतिशत हैं और पूर्णांकन के कारण ये कुल सौ नहीं हो सकते. मसलन, कोई प्रतिशत यदि 5.8 है, तो उसे 6 लिखा गया है, मगर उसकी वजह से उस टेबल के सभी परसेंट का जोड़ 100 नहीं होकर उससे एक या दो कम-ज्यादा हो जायेगा.
पिछले पांच साल में सड़क और बिजली के मोर्चों पर सरकार को सकारात्मक रूप से लिया गया
अस्पतालों की हालत 48 51 1
सड़कें 65 34 1
बिजली आपूर्ति 59 40 1
स्कूल 45 53 2
पेयजल की सुविधा 49 49 2
नोट – संख्याएं प्रतिशत हैं और पूर्णांकन के कारण ये कुल सौ नहीं हो सकते. मसलन, कोई प्रतिशत यदि 5.8 है, तो उसे 6 लिखा गया है, मगर उसकी वजह से उस टेबल के सभी परसेंट का जोड़ 100 नहीं होकर उससे एक या दो कम-ज्यादा हो जायेगा.
पूछा गया सवाल- पिछले पांच वर्षों में इन चीजों में कोई सुधार हुआ या स्थिति और खराब हुई?
