रांची : एसबीआइ ने साधी चुप्पी, स्टाफ एसोसिएशन ने कहा : पहले ही चेताया था

रांची : एटीएम में पैसा डालने वाली एजेंसी सिक्युरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज इंडिया (एसआइएस) कंपनी के दो कर्मचारियों द्वारा चार करोड़ सात लाख रुपये लेकर फरार होने की घटना पर एसबीआइ ने चुप्पी साध ली है. हैरत यह है कि राज्य में अग्रणी बैंक होने के बावजूद एसबीआइ ने मामले में पूरी तरह खुद को […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 19, 2019 9:42 AM
रांची : एटीएम में पैसा डालने वाली एजेंसी सिक्युरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज इंडिया (एसआइएस) कंपनी के दो कर्मचारियों द्वारा चार करोड़ सात लाख रुपये लेकर फरार होने की घटना पर एसबीआइ ने चुप्पी साध ली है.
हैरत यह है कि राज्य में अग्रणी बैंक होने के बावजूद एसबीआइ ने मामले में पूरी तरह खुद को अलग कर लिया है. जबकि बताया जा रहा है कि एजेंसी मुख्य तौर पर एसबीआइ का कैश हैंडलिंग करती थी. ऐसे में जब बैंक से गबन और धोखाधड़ी को लेकर सवाल किया गया, तो उनकी ओर से कहा गया कि वह इस मामले में कोई भी जवाब देने के लिए के लिए अधिकृत नहीं हैं. इस मामले में एसबीआइ के जीएम (एटीएम) का भी जवाब रटा-रटाया था.
एसआइएस के शीर्ष अधिकारी पहुंचे रांची : कैश गड़बड़ी की सूचना पर एसआइएस के शीर्ष अधिकारी बुधवार की सुबह रांची पहुंचे. कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट जेके आकाश के साथ अन्य अधिकारियों ने कार्यालय पहुंचकर कर्मचारियों से मामले की जानकारी ली. कंपनी के एमडी ऋतुराज सिन्हा को भी मामले की जानकारी दी गयी है. हालांकि कंपनी के वीपी आकाश ने बताया कि आंतरिक जांच चल रही है. जल्द ही जांच सार्वजनिक की जायेगी.
कैसे घटी घटना : कोकर के नजदीक इमामकोठी क्षेत्र मेंएसआइएस का क्षेत्रीय कार्यालय है. यह कंपनी कई बैंकों के एटीएम में रुपये डालने का काम करती है. रुपये एटीएम में डालने के बाद शाम को वापस आने के बाद हर रोज हिसाब दे दिया जाता था. मंगलवार को कंपनी ने जब हिसाब मिलाया, तो गड़बड़ी पाई गयी. कार्यालय में कर्मचारियों ने जब कस्टोडियन की चार्ट से हिसाब मिलाया तब पता चला कि करीब 4़ 7 करोड़ रुपये डाले ही नहीं गये.
ये रुपये बैंकों के होते हैं, जो एटीएम में जमा करने के लिएदिये जाते हैं. कंपनी ऑडिट करा रही है, जिससे सही राशि की जानकारी मिल सके. कर्मचारी से जुड़ी जानकारी पुलिस को दे दी गयी है.
जेके आकाश, वाइस प्रेसिडेंट, एसआइएस इंडिया.
कैश हैंडलिंग जैसे मामलों को आउटसोर्स करने को लेकर यूनियन का शुरू से ही विरोध रहा है. कैश का प्रबंधन भाड़े पर देना खतरनाक कदम है. गड़बड़ी एटीएम में पैसा डालने वाले वेंडर करते हैं, जबकि एसबीआइ या सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की साख पर बट्टा लगता है.
राजेश कुमार त्रिपाठी, अध्यक्ष, एसबीआइ स्टॉफ एसोसिएशन पटना सर्किल