पीडीएस में पोर्टेबिलिटी : राशन कार्ड पर अब झारखंड के बाहर भी ले सकेंगे अनाज

झारखंड सहित 12 राज्यों को जोड़ा जायेगा इस सुविधा से रांची : झारखंड के लोग अब 12 राज्यों में से कहीं भी जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकान से मिलनेवाला राशन ले सकेंगे. यह पोर्टेबिलिटी सुविधा अंतरराज्यीय स्तर पार लागू होगी. जनवरी 2020 से यह व्यवस्था लागू होने की संभावना है. नयी व्यवस्था से श्रमिकों […]

झारखंड सहित 12 राज्यों को जोड़ा जायेगा इस सुविधा से

रांची : झारखंड के लोग अब 12 राज्यों में से कहीं भी जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकान से मिलनेवाला राशन ले सकेंगे. यह पोर्टेबिलिटी सुविधा अंतरराज्यीय स्तर पार लागू होगी. जनवरी 2020 से यह व्यवस्था लागू होने की संभावना है. नयी व्यवस्था से श्रमिकों या दूसरे राज्यों में पलायन करनेवाले अन्य लोगों को भी बड़ा लाभ होगा. केंद्र सरकार ने इससे पहले आठ राज्यों में पोर्टेबिलिटी की सुविधा प्रदान की थी. वहीं दूसरे चरण में झारखंड सहित चार अन्य राज्यों को जोड़ा जा रहा है.

आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र व राजस्थान में वहां के पीडीएस लाभुकों को यह सुविधा पहले से मिल रही है. वहीं अब झारखंड सहित गोवा, त्रिपुरा व मध्यप्रदेश को जनवरी 2020 में पोर्टेबिलिटी सेवा से जोड़ा जाना है. इन सभी राज्यों के लाभुक किसी भी राज्य में अनाज ले सकेंगे. इस सुविधा से खाद्य सुरक्षा अधिनियम के दायरे में आनेवाले लाभुकों के परिवार वालों के समक्ष किसी भी परिस्थिति में भूखे रहने की नौबत नहीं रहेगी.

गौरतलब है के इससे पहले झारखंड में राज्य के भीतर कहीं से भी अनाज लेने की सुविधा लागू है. यानी कोई भी पीडीएस लाभुक अपने जिले की पीडीएस दुकान के अलावा किसी अन्य जिले की भी पीडीएस दुकान से अनाज ले सकता है. राज्य के अंदर अब तक करीब 30 हजार लोगों ने इसका लाभ लिया है.

दरअसल पॉश मशीन की सहायता से लाभुक को अनाज उपलब्ध कराया जाता है. इसमें अंगुली के निशान से लाभुक की पहचान होती है. इसलिए यह पोर्टेबिलिटी सुविधा एटीएम कार्ड की तरह कहीं भी इस्तेमाल हो सकती है. लाभुक को सिर्फ अपना राशन कार्ड साथ रखना होता है, जिससे उसकी लाभुक संख्या व अन्य विवरण का पता चलता है.

नयी व्यवस्था से श्रमिकों व दूसरे राज्यों में पलायन करनेवाले लोगों को मिलेगा लाभ

क्या है पोर्टेबिलिटी सुविधा : पोर्टेबिलिटी सुविधा एटीएम कार्ड की तरह कहीं भी इस्तेमाल हो सकती है. लाभुक को सिर्फ अपना राशन कार्ड साथ रखना होता है, जिससे उसकी लाभुक संख्या व अन्य विवरण का पता चलता है

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