रांची : इस बार के विधानसभा चुनाव में पोलिंग पार्टियों को भी मॉक पोल की जिम्मेदारी लेनी होगी. पहली बार आयोग चुनाव करानेवाली टीम को अलग से एक फॉर्म दे रही है. इसमें प्रिजाइडिंग ऑफिसर के अतिरिक्त पोलिंग पार्टियों को भी मॉक पोल का गवाह बनाया गया है.
प्रिजाइडिंग ऑफिसर के साथ-साथ तीनों पोलिंग पार्टियों को भी इसमें हस्ताक्षर करना है. मॉक पोल के दौरान यह तय करने को कहा गया है कि चुनाव प्रत्याशियों की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाये. मशीन से मॉक पोल का डाटा हटा दिये जाने और वीवीपैट मशीन में मॉक पोल की परची हटाने के बाद अधिकारियों और पोलिंग पार्टियों से साइन कराया जायेगा
कैसे होता है मॉक पोल
चुनाव शुरू कराने से पहले चुनाव कराने वाली टीम राजनीतिक पार्टियों के तय प्रतिनिधियों की उपस्थिति में मॉक पोल कराती है. इसके माध्यम से मशीन की स्थिति की जांच की जाती है. कम से कम 50 मॉक पोल कराने का आदेश दिया जाता है. मॉक पोल से संतुष्ट होने के बाद राजनीतिक दल के प्रतिनिधि अपनी उपस्थिति में मॉक पोल कराये जाने संबंधी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते हैं. अगर चुनाव कराने के पूर्व तक राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि नहीं आये, तो चुनाव करानेवाली टीम मॉक पोल कर लेती है.
