झारखंड हाइकोर्ट : लंबित क्रिमिनल अपील निबटाने को नियुक्त होंगे 20 एडवोकेट कमिश्नर

रांची : झारखंड हाइकोर्ट में 10-30 वर्षों से 21,000 से अधिक क्रिमिनल अपील के मामले लंबित चल रहे हैं. हरिभजन सिंह की लंबित क्रिमिनल अपील (डीबी 799/2010) की सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा. इसे हाइकोर्ट के जस्टिस एस चंद्रशेखर की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने गंभीरता से लिया और अपील मामलों को चिह्नित कर कोर्ट के […]

रांची : झारखंड हाइकोर्ट में 10-30 वर्षों से 21,000 से अधिक क्रिमिनल अपील के मामले लंबित चल रहे हैं. हरिभजन सिंह की लंबित क्रिमिनल अपील (डीबी 799/2010) की सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा.
इसे हाइकोर्ट के जस्टिस एस चंद्रशेखर की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने गंभीरता से लिया और अपील मामलों को चिह्नित कर कोर्ट के समक्ष लाने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने इसके लिए 20 अधिवक्ताओं को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने का आदेश भी दिया है.
दरअसल, कई लंबित क्रिमिनल अपील मामलों में या तो अपीलकर्ता की मौत हो गयी है या वह सजा काट कर जेल से बाहर निकल चुका है. इसकी जानकारी न तो अपीलकर्ता की अोर से आैर न ही सरकार की अोर से कोर्ट को दी जाती है. ऐसे मामलों में किसी पक्ष से कोई उपस्थित नहीं होता है. हालांकि, कोर्ट द्वारा सुनवाई की तिथि तय की जाती रहती है. नतीजतन अपील के मामलों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती चली जाती है.
हर िदन 20 अपील : हाइकोर्ट ने निर्देश दिया है कि एडवोकेट कमिश्नर को प्रतिदिन 20 लंबित क्रिमिनल अपील दिये जायें. कमिश्नर अपील मामले में जानकारी एकत्रित कर कोर्ट के समक्ष रखेंगे. इस कार्य के लिए एडवोकेट कमिश्नर को प्रतिदिन 2000 रुपये के हिसाब से मानदेय दिया जाये.
खंडपीठ ने मार्च 2020 तक अपील मामलों को चिह्नित कर लेने का निर्देश दिया. अपीलकर्ता की मृत्यु हो गयी है या वह सजा काट कर जेल से बाहर निकल गया है, वैसे लंबित अपील मामले चिह्नित किये जायेंगे तथा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराया जायेगा. कोर्ट द्वारा संक्षिप्त आदेश पारित कर वैसे लंबित क्रिमिनल अपील मामलों का निष्पादन किया जा सकेगा. इससे हाइकोर्ट व सरकार का कीमती समय बचेगा और अनावश्यक अपील मामलों में कमी आयेगी.
जो मामले लंबित रहेंगे उनका तेजी से निष्पादन भी संभव हो सकेगा.
एक मामले की सुनवाई के दौरान उठा मुद्दा
महाधिवक्ता अजीत कुमार ने सरकार को दी सलाह हाइकोर्ट के आदेश का अनुपालन हो
महाधिवक्ता अजीत कुमार ने बताया कि साधारणतया क्रिमिनल अपील के मामलों में लंबी सुनवाई होती है. हाइकोर्ट में बेंच की लगातार उपलब्धता के बावजूद अधिक संख्या में अपील मामलों का निष्पादन संभव नहीं हो पा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट के न्यायादेश के अनुसार, स्पीडी ट्रायल अथवा अविलंब न्याय की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन 21 हजार अपील लंबित होना बड़ी समस्या है. पुराने अपील की ही जब सुनवाई नहीं हो पा रही है, तो दायर होनेवाले नये अपील भी लंबित ही रहते हैं. लंबित मामलों की संख्या बढ़ती रहती है. महाधिवक्ता ने हाइकोर्ट के आदेश को महत्वपूर्ण कदम बताते हुए मुख्य सचिव डीके तिवारी व अपर मुख्य सचिव (गृह) सुखदेव सिंह को पत्र लिखा है.
महाधिवक्ता ने लिखा है कि लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन की दिशा में हाइकोर्ट का आदेश महत्वपूर्ण है और यह राज्य की स्टेट लिटिगेशन पॉलिसी के उद्देश्यों को पूरा करती है. महाधिवक्ता ने सरकार को सलाह दी है कि कोर्ट के आदेश का अनुपालन किये जाने की जरूरत है, ताकि वर्षों से लंबित चल रहे क्रिमिनल अपील के मामले निष्पादित किये जा सकें.

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