रांची : आठ महीने से बेकार पड़ी है ऑटो एनेलाइज मशीन

रांची : राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के बायोकेमिस्ट्री विभाग की ऑटो एनेलाइज मशीन करीब आठ महीने से बेकार पड़ी हुई है. इसका बोझ लैब मेडिसिन विभाग उठा रहा है. यहां प्रतिदिन 300 मरीजाें की जांच करनी पड़ रही है. इसमें भर्ती और ओपीडी के मरीज शामिल हैं. एक ही विभाग पर जांच का […]

रांची : राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के बायोकेमिस्ट्री विभाग की ऑटो एनेलाइज मशीन करीब आठ महीने से बेकार पड़ी हुई है. इसका बोझ लैब मेडिसिन विभाग उठा रहा है.
यहां प्रतिदिन 300 मरीजाें की जांच करनी पड़ रही है. इसमें भर्ती और ओपीडी के मरीज शामिल हैं. एक ही विभाग पर जांच का ज्यादा बोझ होने के कारण मरीजों को देरी से रिपोर्ट मिल रही है. इसका असर यह है कि डॉक्टर रिपोर्ट पर आधारित दवाइयां समय पर नहीं लिख पाते हैं.
अब जांच रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार
लैब मेडिसिन विभाग में थायराइड, कंप्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी), एचबीएवनसी (तीन माह के शुगर की जांच) आदि की जांच होती है. इसके पहले सभी जांच ऑटो एनेलाइजर मशीन से होती थी. यह अत्याधुनिक मशीन है, जिसमें एक बार में 100 से ज्यादा मरीजों की जांच की जा सकती है. खास बात यह कि मरीजों को उसी दिन जांच रिपोर्ट मिल जाती थी. अब मशीन खराब होने से जांच रिपोर्ट के लिए इंतजार करना पड़ रहा है.
एक लैब कैसे उठाये मरीजों की जांच का लोड
लैब मेडिसिन विभाग में प्रतिदिन विभिन्न वार्ड में भर्ती 40-50 और ओपीडी के 30-40 मरीजों की जांच होती है. वहीं थायराइड के 50, कंप्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) के 150 व एचबीएवनसी के 30-35 मरीजों की भी जांच होती है.

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