रांची : गुरुवार की रात खादगढ़ा बस स्टैंड से ट्रैफिकिंग और बाल मजदूरी के संदेह में मुक्त करायी गयी 12 वर्षीय नाबालिग का बयान शुक्रवार को सीडब्ल्यूसी के सामने कराया गया. सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष रूपा कुमारी के अनुसार नाबालिग रोहतास की रहनेवाली है. वह रोहतास में ट्रेजरी ऑफिसर के रूप में पदस्थापित मोहन स्वरूप में घर में काम करती थी.
मोहन स्वरूप का घर हिनू में है. नाबालिग ने बताया कि उसे घर में नौकरानी का काम लिया जाता था. काम नहीं करने पर घरवाले उसके साथ मारपीट और प्रताड़ित करते थे. इसी कारण वह अपने घर जाना चाहती थी और खादगढ़ा बस स्टैंड आकर रोहतास जानेवाली बस में बैठ गयी थी.
इसी बीच मोहन स्वरूप की पत्नी बस स्टैंड पहुंच गयी और उसे ले साथ जाना चाहती थी. रूपा कुमारी के अनुसार नाबालिग को रोहतास से लाया गया था. उसे कम काम भी कराया जाता था. इसलिए यह ह्यूमन ट्रैफिकिंग, मारपीट और चाइल्ड लेबर का मामला है. नाबालिग का बाद में भी काउंसेलिंग किया जायेगा. उसे शेल्टर होम में रखा गया है. नाबालिग के बयान की प्रति पुलिस को सौंप दी गयी है. पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई कर सकती है.
एक और नाबालिग बची
दूसरी ओर शुक्रवार को चुटिया थाना की पुलिस ने सरकारी बस स्टैंड के समीप से ट्रैफिकिंग की शिकार होने से एक नाबालिग को बचा लिया. पुलिस ने नाबालिग को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया. वहीं, आरोपी पुलिस से बचकर भाग निकला. वह नाबालिग को लेकर दिल्ली जाने वाला था. पुलिस ने बाल अधिकार कार्यकर्ता बैद्यनाथ कुमार की सूचना पर कार्रवाई की.
