रातू : नव पत्रिका पूजन के बाद भक्त कर सकेंगे मां के दर्शन

सप्तमी से दर्शन कर किले की भव्यता का अवलोकन कर सकेंगे श्रद्धालु रातू : क्षेत्र में शारदीय नवरात्र को लेकर माहौल भक्तिमय हो गया है. ऐतिहासिक रातू किला में प्रतिमा को अंतिम रूप दिया जा रहा है. षष्ठी (शुक्रवार) को रात्रि आठ बजे बेलवरण के साथ किले में दुर्गा पूजा आरंभ हो जायेगा. सप्तमी (शनिवार) […]

सप्तमी से दर्शन कर किले की भव्यता का अवलोकन कर सकेंगे श्रद्धालु
रातू : क्षेत्र में शारदीय नवरात्र को लेकर माहौल भक्तिमय हो गया है. ऐतिहासिक रातू किला में प्रतिमा को अंतिम रूप दिया जा रहा है. षष्ठी (शुक्रवार) को रात्रि आठ बजे बेलवरण के साथ किले में दुर्गा पूजा आरंभ हो जायेगा. सप्तमी (शनिवार) को नव पत्रिका पूजन के उपरांत सुबह 10 बजे किला का मुख्य द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जायेगा. संधि पूजन रविवार अपराह्न 2.15 बजे तथा नवमी (सोमवार) को विशेष पूजा कर शाक्त बलि प्रदान की जायेगी. दशमी (मंगलवार) को शाम पांच बजे प्रतिमा का विसर्जन कर किला का मुख्य द्वार बंद कर दिया जायेगा.
बांग्ला मतानुसार होती है पूजा, पौराणिक वस्तुएं देखने को मिलेंगी : रातू किला में बांग्ला मतानुसार दुर्गा पूजा होती आ रही है. इस मौके पर किला के सामने मेला लगाया जाता है. यहां रांची समेत बिहार, बंगाल, अोड़िशा व अन्य राज्यों से लोग पहुंचते हैं. किला के मुख्य द्वार पर रखा तोप, सौ वर्ष पुरानी धूप घड़ी, वृहद गार्डन, म्यूजिकल फाउंटेन देखने योग्य है.
यहां प्रथम नागवंशी महाराजा फणिमुकुट राय के समय से दुर्गा पूजा हो रही है. मूर्ति पूजा करीब डेढ़ सौ साल से हो रही है. इससे पूर्व कलश स्थापित कर पूजा की जाती थी. इस परंपरा को महाराजा चिंतामणि शरण नाथ शाहदेव व युवराज गोपाल शरण नाथ शाहदेव ने कायम रखा. उनके निधन के उपरांत महाराजा की पुत्रवधू प्रियदर्शिनी शाहदेव व पुत्री माधुरी मंजरी देवी, कल्पना कुमारी देवी, तृप्ति मंजरी देवी, गायत्री देवी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं.

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