रांची : तीसी की विकसित दो किस्में सेंट्रल सीड चेन में

रांची : बीएयू द्वारा विकसित तीसी फसल की दो किस्म दिव्या एवं प्रियम को सेंट्रल सीड चेन में शामिल किया गया है. बीएयू को वर्ष 2019-20 में दिव्या किस्म का 01.6 क्विंटल तथा प्रियम किस्म का 01.5 क्विंटल प्रजनक बीज उत्पादन करने का इंडेंट और लक्ष्य भी दिया गया है. इस बीज का विकास विवि […]

रांची : बीएयू द्वारा विकसित तीसी फसल की दो किस्म दिव्या एवं प्रियम को सेंट्रल सीड चेन में शामिल किया गया है. बीएयू को वर्ष 2019-20 में दिव्या किस्म का 01.6 क्विंटल तथा प्रियम किस्म का 01.5 क्विंटल प्रजनक बीज उत्पादन करने का इंडेंट और लक्ष्य भी दिया गया है. इस बीज का विकास विवि अंतर्गत अनुवांशिकी एवं पौधा प्रजनन विभाग द्वारा किया गया है. बीएयू के तीसी शोध परियोजना प्रभारी डॉ सोहन राम ने बताया कि दस वर्षों से अधिक शोध के बाद झारखंड राज्य के लिए अधिक उपज देनेवाली उपयुक्त दो किस्मों को विकसित किया गया.
वर्ष 2016 में तीसी की दिव्या तथा वर्ष 2017 में तीसी की प्रियम किस्म केंद्रीय फसल किस्म रिलीज समिति से अनुशंसित है. इन दोनों किस्मों को राष्ट्रीय सीड चेन में शामिल किया गया है. इन दोनों किस्मों के प्रजनक बीज से राष्ट्रीय स्तर पर अन्य केंद्रों में शोध एवं प्रसार को बढ़ावा दिया जायेगा.
देश में तीसी के उन्नत बीज की काफी मांग : भारत में हर वर्ष तीसी के उन्नत बीज की काफी अधिक मांग होती है. तीसी के दानों का प्रयोग तेल निकालने व औषधि निर्माण और तने के रेशे से विभिन्न उत्पादों के निर्माण में होता है.
वहीं इसके खली का उपयोग गाय के चारे में और मुर्गी के चूजों को खिलाने में होता है. इसमें 20 प्रतिशत प्रोटीन, 37 प्रतिशत वसा और 28 प्रतिशत काब्रोहाइड्रेट पाया जाता है. इसमें मौजूद ओमेगा-तीन की भरपूर मात्रा कोलेस्ट्रोल, ह्रदय एवं गठिया रोग में लाभदायक होती है.

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