रांची : डॉ अजय के विरोध में लगे गो बैक के नारे, हुई धक्का-मुक्की, पुतला भी फूंका

कांग्रेस के आधा दर्जन कार्यकर्ता छह वर्ष के लिए पार्टी से निकाले गये भाजपा में कोई पार्टी का विरोध नहीं करता, कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इसे फॉलो करना चाहिए भाड़े के लोगों को पैसा देकर करा रहे विरोध, इनको व इनके रिश्तेदार को टिकट चाहिए मैं विधानसभा का चुनाव लड़ूंगा, प्रदेश अध्यक्ष को चुनाव लड़ना भी […]

कांग्रेस के आधा दर्जन कार्यकर्ता छह वर्ष के लिए पार्टी से निकाले गये
भाजपा में कोई पार्टी का विरोध नहीं करता, कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इसे फॉलो करना चाहिए
भाड़े के लोगों को पैसा देकर करा रहे विरोध, इनको व इनके रिश्तेदार को टिकट चाहिए
मैं विधानसभा का चुनाव लड़ूंगा, प्रदेश अध्यक्ष को चुनाव लड़ना भी चाहिए
रांची : प्रदेश कांग्रेस में चल रहा विवाद सोमवार को एक बार फिर कांग्रेस मुख्यालय में देखने को मिला. कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय का विरोध किया. इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई.
डॉ अजय गो बैक के नारे भी लगे. प्रदेश अध्यक्ष का पुतला भी फूंका. लोकसभा चुनाव के बाद डॉ अजय करीब 1.45 बजे जिलाध्यक्षों व को-ऑर्डिनेटर की बैठक में हिस्सा लेने को लेकर कांग्रेस भवन पहुंचे थे.
लेकिन पहले से ही कार्यकर्ता विरोध करने का मूड बना चुके थे. जैसे ही डॉ अजय पहुंचे, कार्यकर्ता उनका विरोध करने लगे. साथ ही गो बैक के नारे लगाने लगे. इतना ही नहीं कार्यकर्ता उनके सामने लेट भी गये. इधर महानगर अध्यक्ष संजय पांडेय ने अनुशासन तोड़नेवाले आधा दर्जन कार्यकर्ताओं को छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है.
पत्रकारों से बात करते हुए डॉ अजय ने कहा कि अनुशासन तोड़नेवाले कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई करने के लिए जिलाध्यक्ष सक्षम हैं. उन्होंने कहा कि विरोध टिकट को लेकर है. यह दिखावा है. नेता भाड़े के लोग लेकर आते हैं और विरोध कराते हैं. इसमें भी चंद लोग ही रहते हैं.
अगर नेताओं को भाड़े के लोगों को लाने के लिए पैसे की जरूरत है, तो हमसे ले लें. विरोध कराने वाले भी चाहते हैं कि गठबंधन होना चाहिए, लेकिन मेरी सीट पर नहीं. जैसे ही इन्हें पता चलता है कि इनकी सीट भी गठबंधन में आ रही है तो विरोध शुरू हो जाता है. सुबोधकांत सहाय की ओर से उन पर बाहरी होने के लगाये गये आरोप के सवाल पर डॉ अजय ने कहा कि मैंने पूरी जिंदगी झारखंड व बिहार में गुजार दी.
मेरे बच्चे यहीं के हैं. उनका डोमिसाइल भी यहीं का है. उन्होंने कहा कि भाजपा में सिर्फ एक गुण है कि उनमें से कोई भी पार्टी का विरोध नहीं होता है. कांग्रेस के नेताओं को इस गुण का फॉलो करना चाहिए. विरोध करनेवाले नेता-कार्यकर्ताओं की लड़ाई कांग्रेस पार्टी के हित के लिए नहीं है. इनका विरोध सिर्फ टिकट बंटवारा और अपने रिश्तेदारों को टिकट दिलाने के लिए है. इन्हें पता होना चाहिए कि टिकट बंटवारे में मेरी भूमिका नहीं के बराबर है.
इस पर केंद्रीय नेतृत्व निर्णय लेता है. हालांकि मैं और विधायक दल के नेता आलमगीर आलम भी इसमें शामिल रहते हैं. बैठक में जो भी बातें होती हैं, वह निष्पक्ष होती है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे. प्रदेश अध्यक्ष को चुनाव लड़ना भी चाहिए. गठबंधन की वजह से वे लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ पाये.

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