खान सचिव अबू बकर ने टास्क फोर्स को किया अागाह
सचिव ने कहा-किसी भी सूरत में अवैध उत्खनन नहीं हो
उपायुक्तों को दर पर नियंत्रण रखने का दिया निर्देश
रांची : 10 जून के बाद से ही बालू की कालाबाजारी तेज हो गयी है. ब्लैक में बिक्री हो रही है. एक डंपर बालू की कीमत जहां मई में नौ से 10 हजार रुपये थी. अब बढ़ कर 17 हजार रुपये हो गयी है.
एक ट्रक बालू की कीमत में भी डेढ़ से दो हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है. खान सचिव अबू बकर सिद्दीकी ने बालू की कालाबाजारी व अवैध उत्खनन को लेकर टास्क फोर्स को अगाह किया है. सभी डीएमओ को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि बरसात के मौसम में किसी भी सूरत में बालू का उत्खनन नहीं हो.
हाल के दिनों में कई स्थानों पर डीएमओ ने अवैध बालू जब्त किया है. सचिव ने उपायुक्तों से कहा है कि जिला स्तर पर ही दर का निर्धारण होता है इसलिए उपायुक्त सुनिश्चित करें कि सरकार द्वारा निर्धारित दर से अधिक दर की वसूली न हो. जो ऐसा कर रहे हैं उस पर कार्रवाई के लिए डीसी सक्षम हैं. सचिव ने यह भी कहा है कि एनजीटी के आदेश पर बालू का उत्खनन बंद है, यदि कोई उत्खनन कर रहा है तो टास्क फोर्स ऐसे लोगों पर कार्रवाई करें.
गौरतलब है कि 10 जून से एनजीटी के आदेश पर बालू उत्खनन पर रोक लगते ही रांची समेत अन्य जिलों में भी बालू की कालाबाजारी शुरू हो गयी है. वहीं कई लोग अभी भी अवैध तरीके से बालू का उत्खनन कर रहे हैं.
एनजीटी के आदेश पर बालू उत्खनन पर रोक 15 अक्तूबर तक रहता है. बरसात में बालू की किल्लत न हो इसके लिए राज्य सरकार बालू स्टॉक करने हेतु डीलर लाइसेंस देती है. जिन्हें स्टॉकिस्ट कहा जाता है. ये स्टॉकिस्ट 10 जून तक बालू का स्टॉक रखते जाते हैं. 10 जून के बाद बालू स्टॉकिस्ट के माध्यम से ही मिलता है. मई में जिस बालू की दर 2500 से 3000 रुपये प्रति ट्रक थी अभी वही बालू की दर चार हजार से लेकर 4500 रुपये तक हो गयी है.
सरकारी दर की परवाह नहीं : झारखंड सरकार द्वारा बालू की जो दर निर्धारित की गयी है उसके अनुसार एक सौ सीएफटी की दर 400 रुपये है. एक टर्बो 709 ट्रक में 130 सीएफटी बालू की क्षमता है. इसका भाड़ा आदि खर्च जोड़कर दर करीब 2200 से 2500 रुपये तक ही आती है. जबकि आज की तिथि में इस दर पर कहीं भी बालू की आपूर्ति नहीं हो रही है. एक बालू कारोबारी ने बताया कि दर बढ़ने का कारण है कि स्टॉकिस्ट द्वारा बालू की क्राइसिस कर दिया जाना है.
मांग के अनुरूप बालू की आपूर्ति नहीं हो रही है. जिसके कारण कालाबाजारी बढ़ गयी है. हाइवा में भी कम बालू की आपूर्ति की जा रही है. चालान कम काटा जा रहा है. गौरतलब है कि बालू की कालाबाजारी न हो इसके लिए सरकार ने डीलरों को स्टॉक लाइसेंस दिया था. पर स्टॉकिस्ट ही कृत्रिम कमी बताकर बालू की दर मनमाने तरीके से ले रहे हैं.
