रांची/चंदवा/बरियातू : राजधानी के रानी अस्पताल में शुक्रवार सुबह लातेहार की फुलसू पंचायत के करमा निवासी रंजीत कुमार सिंह के तीन वर्षीय पुत्र सत्यम कुमार की मौत हो गयी. बच्चे को बुखार था, साथ ही उसे बार-बार झटके भी आ रहे थे. बच्चे को एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम(एइएस) का लक्षण पाया गया है. यह उसी चमकी बीमारी का लक्षण हैं, जिससे बिहार के मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत हाे रही है.
हालांकि, रानी अस्पताल में इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा कुछ घंटे ही अस्पताल में भर्ती रहा. इस वजह से उसकी जांच नहीं हो पायी. जांच होती, तभी यह स्पष्ट हो पाता कि वह एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से पीड़ित था या नहीं. बच्चा दो दिन पहले अररिया के रानीगंज से लौटा था. इसलिए डॉक्टर अनुमान लगा रहे हैं कि बच्चा चमकी बुखार की चपेट में आया होगा.
इधर, बेटे की मौत की सूचना के बाद मां पूनम देवी समेत पूरा परिवार सदमे में है. जानकारी के अनुसार गुरुवार रात करीब 8:30 बजे सत्यम को अचानक तेज बुखार आया. उसे झटके आने लगे. परिजन आनन-फानन में 108 एंबुलेंस की मदद से पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बालूमाथ लाये. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ अशोक ओड़ीया ने बच्चे को देखने के बाद कहा कि अस्पताल में इस बीमारी का इलाज नहीं है.
इसे रांची ले जाइए. इसके बाद परिजन दूसरी एंबुलेंस से रानी अस्पताल ले आये. यहां आइसीयू में रख कर बच्चे का इलाज शुरू किया गया, लेकिन शुक्रवार तड़के चार बजे बच्चे की तबीयत बिगड़ गयी और तड़के पांच बजे उसकी मौत हो गयी है. परिजन बच्चे का शव लेकर गांव चले गये, जहां उसका अंतिम संस्कार किया गया.
बालूमाथ सीएचसी से रांची रेफर किया गया था बच्चे को
लातेहार के फुलसू पंचायत के करमा निवासी रंजीत कुमार सिंह का बेटा था सत्यम
हालत बिगड़ी, तो गुरुवार देर रात ही रांची के रानी अस्पताल लेकर आये थे परिजन
शुक्रवार तड़के चार बजे बिगड़ी हालत, घंटे भर के अंदर बच्चे ने दम तोड़ दिया
अस्पताल में कम समय रहने के कारण बच्चे की जांच भी नहीं कर पाये डॉक्टर
लक्षणों के आधार पर एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम की आशंका जतायी जा रही
चाचा ने कहा : चमकी जैसे लक्षण दिख रहे थे सत्यम में, मेरा बेटा भी दो दिन से बीमार है
चाचा संजीत सिंह ने बताया कि बुखार के तुरंत बाद सत्यम झटका आने लगा. वह हाथ-पैर पटक रहा था. हम लोग भाई के ससुराल बिहार के अररिया जिला के रानीगंज गये थे. वहां चमकी से पीड़ित कई बच्चों को देखा. सत्यम के बीमार होने के बाद उसमें भी वैसे ही लक्षण दिख रहे थे.
बालूमाथ अस्पताल में अगर सत्यम का इलाज शुरू हो जाता, तो शायद उसकी जान बच जाती. संजीत ने बताया कि उनका बेटा दिव्यांशु (एक वर्ष) भी दो दिन पूर्व ही रानीगंज बिहार से आया है. उसे भी गुरुवार रात से बुखार है. हमें डर है कि कहीं यह बुखार भी चमकी नहीं निकले. सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए
बच्चा हमारे अस्पताल में कुछ घंटे ही भर्ती रहा. एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम(एइएस) जैसा लक्षण मिल रहे थे, लेकिन बिना जांच के कुछ नहीं कहा जा सकता है. झटका के साथ तेज बुखार था, इसलिए वहां पर एइएस कहते हुए रेफर किया गया था. बच्चा बिहार से आया था, इसलिए उसके परिजन मुजफ्फरपुर में चल रही बीमारी की आशंका जाहिर कर रहे थे.
डॉ राजेश कुमार, शिशु रोग विशेषज्ञ, रानी अस्पताल
