गुमला से लापता बच्ची के मामले में हाइकोर्ट सख्त, सात साल से नहीं मिला है कोई सुराग

Jharkhand High Court: गुमला से वर्ष 2018 में लापता बच्ची के मामले में झारखंड हाइकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने अब तक पदस्थापित सभी एसपी और अनुसंधानकर्ताओं को तलब किया है. सात साल बाद भी बच्ची का पता नहीं चलने पर पुलिस जांच और कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड हाइकोर्ट ने गुमला जिले से वर्ष 2018 में लापता हुई नाबालिग बच्ची के मामले में सख्त रुख अपनाया है. मामले में दायर हेवियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गुमला पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी जताई. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सात साल बीत जाने के बाद भी पुलिस बच्ची का पता नहीं लगा सकी है, जो बेहद गंभीर मामला है. कोर्ट ने वर्ष 2018 से अब तक गुमला में पदस्थापित रहे सभी पुलिस अधीक्षकों (एसपी) और मामले के अनुसंधानकर्ताओं को अगली सुनवाई में सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है.

केस डायरी देखने के बाद कोर्ट ने उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने केस डायरी का अवलोकन किया और जांच प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए. कोर्ट ने गुमला के एसपी से पूछा कि मुख्य आरोपी का बयान अब तक रिकॉर्ड क्यों नहीं किया गया. इस पर एसपी ने कोर्ट को बताया कि जब भी पुलिस आरोपी के घर पहुंची, तब परिवार की ओर से यही जानकारी दी गई कि आरोपी बीमार है. इस जवाब पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद कार्रवाई क्यों नहीं की गई. खंडपीठ ने यह भी कहा कि पीड़िता की मां ने शुरुआत में ही कुछ लोगों पर संदेह जताया था, फिर उनसे तत्काल पूछताछ क्यों नहीं की गई. कोर्ट ने साफ कहा कि शुरुआती जांच में लापरवाही बरती गई है.

पुलिस व्यवस्था पर भी कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने पुलिस व्यवस्था को लेकर भी मौखिक टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि आज भी आम लोग थाना में शिकायत दर्ज कराने जाते हैं, तो उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता. खंडपीठ ने कहा कि कई मामलों में मुंशी लोगों को थाने से भगा देते हैं. यहां तक कि मोबाइल चोरी या गुम होने पर सनहा दर्ज कराने गए लोगों को भी परेशान किया जाता है. कोर्ट ने धुर्वा और जगन्नाथपुर थाना का उदाहरण देते हुए पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए. कोर्ट की इन टिप्पणियों से साफ संकेत मिला कि न्यायपालिका पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं है.

एसआईटी की तीन टीमों ने कई राज्यों में की तलाश

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने कोर्ट को बताया कि मामले की जांच के लिए नई एसआईटी गठित की गई है. एसआईटी की तीन अलग-अलग टीमों ने बच्ची की तलाश में कई राज्यों में अभियान चलाया. उन्होंने बताया कि टीमें मुंबई, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और जम्मू तक गईं, लेकिन अब तक बच्ची का कोई सुराग नहीं मिल पाया है. सरकार की ओर से कोर्ट को भरोसा दिलाया गया कि मामले की जांच जारी है और हर संभव प्रयास किया जा रहा है. हालांकि कोर्ट ने इस पर भी संतोष नहीं जताया और जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया.

छह वर्षीय बच्ची सितंबर 2018 से लापता

उल्लेखनीय है कि गुमला जिले की छह वर्षीय बच्ची सितंबर 2018 से लापता है. बच्ची की मां चंद्रमुनी उराइन ने अपनी बेटी की बरामदगी को लेकर झारखंड हाइकोर्ट में हेवियस कॉर्पस याचिका दायर की है. परिवार का आरोप है कि पुलिस ने मामले में शुरुआत से गंभीरता नहीं दिखाई, जिसके कारण आज तक बच्ची का पता नहीं चल पाया है. लंबे समय से बच्ची की तलाश कर रही मां लगातार न्याय की गुहार लगा रही है.

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नौ जून को होगी अगली सुनवाई

हाइकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए नौ जून की तिथि निर्धारित की है. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई के दौरान गुमला के वर्तमान एसपी, एसआईटी प्रमुख और मामले से जुड़े सभी अनुसंधानकर्ता उपस्थित रहें. कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब इस मामले में पुलिस प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है. वहीं पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद मामले की जांच में तेजी आएगी और बच्ची का सुराग मिल सकेगा.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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