सतीश सिंह
Ranchi: कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के बीएयू सभागार में दो दिनी खरीफ कार्यशाला के दूसरे दिन मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने अधिकारियों के लिए काम का टाइम लाइन तय किया. आने वाले खरीफ मौसम में कौन-कौन काम कब करना है, इसकी तिथि निर्धारित कर दी गई. कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि इस वर्ष अल नीनो का असर होने का अनुमान है. इससे खेती प्रभावित हो सकती है. ऐसे में अधिकारियों को किसानों के लिए सेना की तरह काम करना होगा. उन्होंने कहा कि किसानों की सुरक्षा, समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज, सिंचाई सुविधा, कृषि ऋण, उर्वरक एवं दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. मंत्री ने कहा कि इस खरीफ में बीज वितरण व्यवस्था में एफपीओ और एसएचजी की भागीदारी सुनिश्चित किया गया है.
हरेक जिले का इंटीग्रेटेड प्लान बनायें
विभाग के विशेष सचिव गोपाल जी तिवारी ने कहा कि हरेक जिले की एक इंटीग्रेडेट (एकीकृत) योजना होनी चाहिए. इसमें जिले का पूरा ब्योरा और संबद्ध विभाग से तालमेल भी दिखना चाहिए. राज्य के संभावित सूखे को लेकर कितनी बीज की जरूरत होगी, यह भी जिला स्तर से ही आयेगा. राज्य को इससे अवगत कराइए. बैठक में जिला पशुपालन पदाधिकारियों के उपस्थित नहीं रहने पर वह नाराज भी हुए. बीएयू के कुलपति डॉ एससी दुबे ने कहा कि हर जिलों के पास एक आकड़ा होना चाहिए. जिससे जिले की मैपिंग हो सके. मौके पर निदेशक समिति विकास कुमार भी मौजूद थे.
क्या-क्या टाइम लाइन दिया मंत्री ने
- 15 मई को कृषि व संबद्ध विभाग की बैठक बुलाकर सूखे से निपटने की योजना तैयार करें.
- 20 मई को जिला स्तरीय खरीफ मेले का आयोजन करें. कम से कम 500 प्रगतिशील किसानों को बुलायें.
- 22 मई को प्रखंड स्तर पर खरीफ मेले का आयोजन करें. हरेक पंचायत से 300 प्रतिनिधि बुलायें.
- 25 मई तक सभी जिलों के जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) बीज वितरण को इच्छुक एसएचजी एवं एफपीओ की अंतिम सूची प्राप्त होगी.
- 27 मई 2026 को सभी डीएओ समेकित सूची कृषि निदेशालय को प्रेषित करेंगे.
- जून के पहले सप्ताह में पशुपालन विभाग राज्य स्तर दवाइयों का टेंडर कर दें.
- जून के मध्य जून तक सभी प्रखंडों में दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित कर दें.
- 2025-26 योजना का भूमि संरक्षण हो रहे तालाब जीर्णोद्धार को मई अंत तक हर हाल में पूरा करें. इसके बाद का भुगतान नहीं होगा.
- मई अंत तक मत्स्य बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित कर दें.
- एक माह में 2024, 2025 की लंबित मशीनीकरण योजना (भूमि संरक्षण) के लाभूकों का आवेदन निष्पादित कर दें
- एक माह में दो एचपी सोलर पंप आवेदनों को निष्पादित कर दें.
- ड्रिप एरिगेशन और मल्चिंग संबंधित आवेदन का निष्पादन जून माह तक कर लें.
- इसी माह में मधु मक्खी पालन और लाह की खेती की योजना की प्रक्रिया पूरी कर लें.
निदेशकों ने किया सरकार के मुखिया का अपमान : कृषि मंत्री
खरीफ फसल की तैयारी एवं संभावित सूखे से निबटने के लिए कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग ने बीएयू सभागार में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया था. पहले दिन जिलावार आकस्मिक फसल योजना की प्रस्तुति की गयी थी. दूसरे दिन खरीफ और सूखे को लेकर तैयारी पर चर्चा होनी थी. आश्चर्य की बात यह है कि इस कार्यशाला में अपने विभाग के निदेशक ही नहीं पहुंचे. इस विभाग में सचिव के साथ-साथ निदेशक स्तर पर पांच भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी पदस्थापित हैं. इसमें कृषि, पशुपालन, उद्यान, भूमि संरक्षण के निदेशक के साथ-साथ सहकारिता विभाग के निबंधक भी शामिल हैं. इसके अतिरिक्त मत्स्य और गव्य के निदेशक भी मूल कैडर से हैं.
अधिकारियों की अनुपस्थिति से नाराज हुई मंत्री
कार्यशाला में अधिकारियों की अनुपस्थिति पर मंत्री नाराज हो गयी. उन्होंने कहा कि आज एक भी निदेशक उपस्थित नहीं है. यह गलत है. यह समझ से परे है. यह सरकार और राज्य के मुखिया का अपमान है. इन अधिकारियों ने किसानों का अपमान किया है. राज्य में किसानों से महत्वपूर्ण कोई नहीं है. जो अपना काम नहीं करेंगे. उनके लिए भी मेरे पास उपाय है. वह होगा. दूसरे दिन बैठक में भारतीय प्रशासनिक सेवा के केवल एक अधिकारी विशेष सचिव गोपाल जी तिवारी ही मौजूद रहें.
सचिव गये सीएस की बैठक में, निदेशक रहे कार्यालय में
विभागीय सचिव अबु बकर सिद्दीकी मंगलवार की सुबह रेडिशन ब्लू में एक संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में गये. वहां से मुख्य सचिव की बैठक में हिस्सा लेने चले गये. इसकी जानकारी उन्होंने मंत्री को भी दी. कृषि निदेशक भोर सिंह यादव प्रशिक्षण लेने मसूरी चले गये हैं. उद्यान निदेशक माधवी मिश्रा कांके रोड स्थित कार्यालय में विभागीय कामकाज निबटाती रही. उनके पास ही भूमि संरक्षण निदेशक का भी प्रभार है. सहकारिता निबंधक शशि रंजन और पशुपालन निदेशक आदित्य कुमार रंजन भी अपने-अपने कार्यालय में रहे. डेयरी निदेशक डॉ संजीव कुमार और मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार भी अपने-अपने कार्यालय में रहे. सभी अधिकारी 3.30 बजे से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक की तैयारी में लगे थे. कई विभागीय प्रमुखों ने अपना-अपना प्रतिनिधि भेज दिया था.
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