रांची : रिम्स में सेलेब्रल पाल्सी (दिमागी बुखार का एक प्रकार) से पीड़ित 14 वर्षीय सोनू कुमारी की मौत हो गयी है. बच्ची बोकारो की रहने वाली थी और उसकी मौत 15 जून को हुई है. वहीं, शिशु विभाग के दोनों वार्ड में दिमागी बुखार व इंसेफलाइटिस से पीड़ित दो बच्चों का इलाज चल रहा है.
12 वर्षीय तनीशा का इलाज डॉ मिन्नी रानी अखौरी की देखरेख में चल रहा है. वहीं, नौ माह की बच्ची स्तुति का इलाज डॉ एक चौधरी की देखरेख में चल रहा है. नौ माह की बच्ची दिमागी बुखार (मैनिंजाइटिस) की चपेट में आ गयी है.
बच्ची की मां ने बताया कि बुखार होने पर वह बच्ची को पलामू के सदर अस्पताल में इलाज के लिए ले गयी थी, जहां से उसे रिम्स रेफर कर दिया गया. बच्ची एक सप्ताह से यहां भर्ती है. उसको झटके आ रहे थे, जिसके आधार पर उसे दिमागी बुखार की दवाएं दी जा रही हैं. परिजनों ने बताया कि सोमवार से झटका आना से और बढ़ गया है. डॉक्टरों ने कहा है कि उसकी स्थिति गंभीर है.
अस्पताल में दिमागी बुखार व इंसेफलाइटिस से पीड़ित बच्चे भर्ती हैं. चमकी बुखार जो बिहार में फैला हुआ है. उस बीमारी से कोई पीड़ित बच्चा शिशु विभाग में भर्ती नहीं हुआ है.
डॉ एके चौधरी, विभागाध्यक्ष शिशु विभाग
रांची : संत बरनाबास अस्पताल में डॉक्टरों का सात दिनों का कार्य बहिष्कार शुरू
रांची : संत बरनाबास अस्पताल में नये मेडिकल डायरेक्टर की नियुक्ति के खिलाफ डॉक्टरों का सात दिवसीय कार्य बहिष्कार सोमवार को शुरू हुआ. इस विषय पर डॉक्टरों और स्टाफ ने अस्पताल के चेयरमैन बिशप बीबी बास्के को 10 जून को ज्ञापन दिया था और 72 घंटों में इस बाबत स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा था.
चेयरमैन से कोई जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने शनिवार को अस्पताल में बैठक की, जिसमें निर्णय लिया गया कि सोमवार से सात दिनों तक सभी डॉक्टर कार्य बहिष्कार करेंगे. ओपीडी में नहीं बैठेंगे. इस दौरान सिर्फ आपातकालीन मामले देखे जायेंगे. इस अस्पताल में हर दिन लगभग 120 मरीज आते हैं, जिनका इलाज 30 डाॅक्टरों द्वारा किया जाता है.
इस बाबत पूछने पर नये मेडिकल डायरेक्टर डाॅ विक्रम तिर्की ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार आइएमए के राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत डाॅक्टरों सोमवार को कार्य बहिष्कार कर रहे हैं, पर इमरजेंसी चालू है. उन्हें सात दिनों के कार्य बहिष्कार के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
