रांची : एक अप्रैल, 2019 से बिजली की दर बढ़ा दी गयी है. इसके बाद भी जेबीवीएनएल द्वारा दरों की समीक्षा के लिए आवेदन दिया गया है. इसकी सुनवाई 10 जून को होगी. इस आवेदन को स्वीकार ही नहीं किया जाना चाहिए था. जब एक बार दर तय हो गयी है, तो फिर समीक्षा क्यों. ऐसा करके एक बार फिर बिजली की दरों को बढ़ाने की साजिश की जा रही है. यह बातें झारखंड चेंबर के अध्यक्ष दीपक मारू और जेसिया के अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने संयुक्त रूप से शुक्रवार को जेसिया सभागार में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कही.
फिर बिजली की दर बढ़ाने की साजिश कर रहा जेबीवीएनएल
रांची : एक अप्रैल, 2019 से बिजली की दर बढ़ा दी गयी है. इसके बाद भी जेबीवीएनएल द्वारा दरों की समीक्षा के लिए आवेदन दिया गया है. इसकी सुनवाई 10 जून को होगी. इस आवेदन को स्वीकार ही नहीं किया जाना चाहिए था. जब एक बार दर तय हो गयी है, तो फिर समीक्षा क्यों. […]

उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (जेएसइआरसी) ग्राहकों की हिताें की रक्षा नहीं कर पा रही है. वह जेबीवीएनएल के लिए काम कर रही है. जिस मकसद से आयोग बनाया गया है, वह पूरा नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि आयोग के इस रवैये से आमलोग सहित पूरा उद्योग व व्यापार छला हुआ महसूस कर रहे हैं. इसी कारण भविष्य में आयोग के आयोजनों का बहिष्कार करेंगे. आयोग में ऐसे लोगों को भेजा जाये, जो उपभोक्ता के हितों की रक्षा कर सकें.
महंगी बिजली दे रहा जेबीवीएनएल, इसके बाद भी संतुष्टि नहीं : उन्होंने कहा कि जेबीवीएनएल महंगी बिजली दे रहा है. इसके बाद भी वह संतुष्ट नहीं है. इसे ऐसे समझ सकते हैं. एक इंडस्ट्री अगर एक लाख यूनिट बिजली का उपभोग करता है, तो डीवीसी इसके लिए लगभग 4,75,000 रुपये चार्ज करती है. जबकि जेबीवीएनएल इतने ही यूनिट के लिए उस इंडस्ट्री को 6,55,000 रुपये चार्ज कर रही है.
वहीं, जुस्को इसके लिए 4,84,500 रुपये चार्ज कर रही है. इतना पैसे लेने के बाद भी क्वालिटी की बिजली नहीं दे रही है. आयोग ने चेंबर की कई की कई बातों को दरकिनार कर दिया. मौके पर झारखंड चेंबर के महासचिव कुणाल अजमानी, जेसिया के अंजय पचेरीवाला, विनोद तुलस्यान उपस्थित थे.