मानव तस्करी की शिकार युवती खो चुकी है अपना मानसिक संतुलन, अब बेड़ियों में कट रही जिंदगी

मांडर : प्रखंड के नारो गांव की एक 25 वर्षीय युवती की जिंदगी घर में ही बेड़ियों में कैद होकर कट रही है. बताया जा रहा है कि तीन साल पहले वह मानव तस्करी का शिकार होकर दिल्ली गयी थी. वहां नौ महीने के प्रवास के दौरान उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया. तब से उसके […]

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मांडर : प्रखंड के नारो गांव की एक 25 वर्षीय युवती की जिंदगी घर में ही बेड़ियों में कैद होकर कट रही है. बताया जा रहा है कि तीन साल पहले वह मानव तस्करी का शिकार होकर दिल्ली गयी थी. वहां नौ महीने के प्रवास के दौरान उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया. तब से उसके असामान्य व्यवहार को लेकर परिजनों ने ही उसके एक पैर में लोहे की बेड़ी के साथ जंजीर लगा दी है. जवान बेटी को बेड़ी में जकड़ कर रखना भी माता-पिता की मजबूरी है.

युवती के पिता रिटायर्ड फौजी हैं. वे बताते हैं कि जिस बेटी की मानसिक स्थिति बिगड़ी है, वह चार-भाई बहनों में सबसे बड़ी है. पहले वह ऐसी नहीं थी. उसने दसवीं तक पढ़ाई की है. मैट्रिक में फेल होने पर उसने पढ़ाई छोड़ दी.
इसी दौरान बुढ़ाखुखरा के एक युवक के नौकरी के प्रलोभन पर वह दिल्ली चली गयी. दिल्ली में करीब नौ माह के प्रवास के दौरान पता नहीं उसके साथ क्या हुआ, उसकी दिमागी हालत बिगड़ गयी. उक्त युवक ही उसे दिल्ली से वापस ले आया और उनके हवाले कर दिया.
घर लौटने के बाद हमेशा चुप रहती थी युवती
पिता ने बताया कि घर लौटने के बाद उनकी बेटी हमेशा चुप रहती थी. पूछने पर भी कुछ नहीं बोलती थी. अकारण ही इधर-उधर घूमती रहती थी. उन्होंने रिनपास के अलावा अन्य जगहों पर उसका इलाज कराया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ.
वे जवान बेटी को असामान्य स्थिति में इधर-उधर घूमने के लिए खुला छोड़ नहीं सकते थे. इसलिए मजबूरन उसके पैर में जंजीर डालनी पड़ी. अब उसका खाना-पीना, उठना-बैठना व घूमना-फिरना भी जंजीर के साथ ही होता है. सही ढंग से देखभाल व उचित खान पान के अभाव में वह बेहद कमजोर हो गयी है. उसका स्वास्थ्य भी लगातार खराब हो रहा है.
पीड़ादायक
नौकरी का प्रलोभन दे दिल्ली ले गया था बुढ़ाखुखरा का युवक
मानसिक स्थिति बिगड़ी, तो घर वालों के सुपुर्द कर चला गया
जवान बेटी को बेड़ियों में जकड़ कर रखना मां-बाप की विवशता
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