रांची : सांसदों में यह खासियत तो होनी ही चहिए कि वह सुलभता से क्षेत्र की जनता को उपलब्ध हों. उनका कार्यालय रांची और दिल्ली में सदैव समय पर खुला रहे तथा वह फोन-मोबाइल पर उपलब्ध रहें. इस संदर्भ में मैं खूंटी के सांसद कड़िया मुंडा का उल्लेख करना चाहूंगा, जिनके यहां दिल्ली में झारखंड के लोगों को हर सुविधा मिलती रही है.
यहां मैं उदाहरण के तौर पर सीपी सिंह का नाम इसलिए ले रहा हूं, क्योंकि वह अपने निवास व कार्यालय में अासानी से उपलब्ध रहते हैं. सांसदों को अपने क्षेत्र की समस्या प्रमुखता से उठानी चाहिए. सांसदों के लिए उदघाटन व भाषण से ज्यादा जरूरी है, उनका स्वच्छ छवि, निर्भय तथा क्षेत्र के विकास के लिए चिंता करने वाला होना. उसे अपने क्षेत्र की प्रमुख समस्याअों के बारे मालूम होना चाहिए. अौर हां, सांसद के कार्य से भाई-भतीजावाद की बू नहीं आनी चाहिए. यह भी नहीं होना चाहिए कि उस पर किसी खास समुदाय या खास जाति वर्ग के हितैषी होने का ठप्पा लगे.
डॉ रतन प्रकाश, रांची विवि में हिंदी के पूर्व विभागाध्यक्ष रहे हैं
