चालीसा का पुण्यकाल : ईश्वर सबकुछ देखता है

फादर अशोक कुजूर एक बार एक महात्मा के पास दो व्यक्ति शिष्य बनने की इच्छा से आये. शिष्य बनाने से पहले महात्मा ने उन्हें परखना चाहा़ उन्होंने दोनों को एक-एक चिड़िया दी और कहा- जाओ, इन्हें ऐसी जगह मारो, जहां कोई और न देख रहा हो़ उनमें से एक तुरंत ही पेड़ की ओट में […]

फादर अशोक कुजूर
एक बार एक महात्मा के पास दो व्यक्ति शिष्य बनने की इच्छा से आये. शिष्य बनाने से पहले महात्मा ने उन्हें परखना चाहा़ उन्होंने दोनों को एक-एक चिड़िया दी और कहा- जाओ, इन्हें ऐसी जगह मारो, जहां कोई और न देख रहा हो़ उनमें से एक तुरंत ही पेड़ की ओट में जाकर उस चिड़िया को मार आया़ दूसरा भी एक सुनसान जगह पर चला गया़
वह चिड़िया को मारने वाला ही था कि अचानक सोचने लगा- जब मैं इसे मारता हूं, तो यह मुझे देखती है़ मैं भी इसे देखता हूं और ईश्वर भी यह सब कुछ देख रहा है़ यह सोचते हुए दूसरा व्यक्ति उस चिड़िया को महात्मा के पास जीवित ही ले आया. उसने कहा कि उसे कोई ऐसी जगह नहीं मिली, जहां कोई न देख रहा हो़ महात्मा ने कहा – तुम मेरे शिष्य बनने के योग्य हो़
आजकल कई जगहों पर यह लिखा होता है- आप सीसीटीवी कैमरे की नजर में है़ं ऐसा पढ़ते ही हम सतर्क हो जाते है़ं कोई गलत काम करने से परहेज करते है़ं जरा सोचिए, ईश्वर का सीसीटीवी कैमरा तो 24 घंटे ऑन है और हर जगह मौजूद है़ यदि ईश्वर को हर जगह मौजूद समझें तो हम कितनी ही बुराइयों से बच सकते है़ं चालीसा काल में हम चिंतन करें कि ईश्वर सबकुछ देखता है़ उससे कुछ छिपा नहीं है़ लेखक डॉन बास्को यूथ एंड एजुकेशनल सर्विसेज बरियातू के निदेशक हैं

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