रांची : मोदी भाइयों की याचिका खारिज एसएआर कोर्ट का फैसला सही, जानें क्‍या है पूरा मामला

जमीन वापस करने के फैसले में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं : हाइकोर्ट रांची : हाइकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमथ पटनायक की अदालत ने सुभाष मोदी-गाैतम माेदी द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी है. साथ ही यह भी कहा है कि एसएआर कोर्ट द्वारा तेतरा पाहन व जतरू पाहन को जमीन वापस करने का फैसला सही […]

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  • जमीन वापस करने के फैसले में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं : हाइकोर्ट
रांची : हाइकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमथ पटनायक की अदालत ने सुभाष मोदी-गाैतम माेदी द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी है. साथ ही यह भी कहा है कि एसएआर कोर्ट द्वारा तेतरा पाहन व जतरू पाहन को जमीन वापस करने का फैसला सही है. इसमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है.
माेदी भाइयाें द्वारा ही लालपुर-काेकर मार्ग पर राजधानी की सबसे ऊंची बिल्डिंग बनायी जा रही है.जमीन वापसी का दिया था आदेश : सुभाष मोदी व गाैतम मोदी की अोर से हाइकोर्ट में रिट याचिका (डब्ल्यूपीसी -5162/2003) दायर की गयी थी. इसमें 17 अगस्त, 1981 को एसएआर कोर्ट के फैसले को निरस्त करने की मांग की गयी थी.
एसएआर कोर्ट ने केस नंबर 365/1979-80 में फैसला सुनाते हुए छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 71ए के तहत 2.05 एकड़ जमीन वापस करने का आदेश दिया था. एसएआर कोर्ट के फैसले के खिलाफ मोदी भाइयाें की अोर से उपायुक्त की अदालत में अपील दायर की गयी थी.
रांची के उपायुक्त ने भी मोदी भाइयाें की अपील की सुनवाई के बाद एसएआर कोर्ट के फैसले को सही करार दिया था. इसके बाद सुभाष मोदी व गाैतम मोदी ने कमिश्नर की अदालत में अपील की थी. कमिश्नर ने 17 मई, 2003 को अपना फैसला सुनाया आैर एसएआर कोर्ट के फैसले को सही करार दिया था.
हाइकोर्ट में प्रार्थी की अोर से यह दलील पेश की गयी थी कि टाइटल सूट नंबर 408/1960 में रांची के मुंसिफ मजिस्ट्रेट की अदालत ने जमीन के मालिकाना हक पर उभरे विवाद की सुनवाई के बाद नमिता रानी दास के पक्ष में फैसला दिया था. नमिता रानी दास का उक्त जमीन पर निर्विवादित कब्जा था. नमिता रानी दास ने आरएस प्लॉट 153 में से 0.65 एकड़ जमीन बेच दी. एक अक्तूबर 1962 में जमीन खरीदने के बाद पेवियर्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ने उक्त जमीन पर भवन निर्माण का कार्य शुरू किया. बाद में उसने यह जमीन सुभाष कुमार मोदी को 1970 में बेच दी.
1946 में बंदाेबस्त की गयी थी : प्रतिवादी तेतरा पाहन व जतरू पाहन की अोर से अदालत में अपना पक्ष पेश करते हुए यह कहा गया कि संबंधित जमीन खतियान में लोधा पाहन के नाम से भुईहरी पाहनी जमीन के रूप में दर्ज है.
यह जमीन आदिवासियों को पूजा-पाठ आदि के लिए 1946 में बंदोबस्त की गयी थी. छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 48 में निहित प्रावधानों के तहत भुईहरी जमीन का हस्तांतरण नहीं किया जा सकता है. अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद 29 जनवरी, 2019 को अपना फैसला सुनाते हुए रिट याचिका खारिज कर दी तथा एसएआर कोर्ट के फैसले को सही ठहराया.
माेदी भाई ही राजधानी की सबसे ऊंची बिल्डिंग बना रहे
बाेले सुभाष व गाैतम माेदी यह मोदी हाइट्स बिल्डिंग की जमीन का मामला नहीं
यह 2.05 एकड़ जमीन का जो मामला है, वह मोदी हाइट्स के पीछे स्थित है आैर हमारी है. नमिता रानी दास की उक्त जमीन छपरबंदी में तब्दील हो गयी थी.
उनसे जमीन खरीदने के बाद विधिवत म्यूटेशन हुआ था. लगान जमा किया जाता है. हाइकोर्ट में हमने 2.05 एकड़ जमीन पर कोई निर्माण नहीं करने संबंधी शपथ पत्र भी दाखिल किया था. मोदी हाइट्स बिल्डिंग से इस जमीन का कोई लेना-देना नहीं है.
मोदी हाइट्स व विवादित 2.05 एकड़ जमीन का खाता व प्लॉट अलग-अलग है. दोनों में कोई समानता नहीं है. मोदी हाइट्स की जमीन कोलकाता निवासी श्री घोष से खरीदी गयी थी. रांची नगर निगम ने पूरी जांच के बाद दो ब्लॉक का नक्शा पास किया था, जिसमें 25 व 15 मंजिली मोदी हाइट्स बिल्डिंग बनाययी जा रही है, जो अंतिम चरण में है.
सब कुछ विधिवत है तथा नियमित तरीके से सरकार को लगान का भुगतान किया जाता है. जिस जमीन पर बिल्डिंग बनी है, वह छपरबंदी जमीन है तथा उस पर कही से कोई विवाद नहीं है. विवाद की जड़ अधिवक्ता है, जो हमारी बिल्डिंग को विवादित बनाना चाहते है. हाइकोर्ट का जो फैसला आया है, उसके खिलाफ अपील में जायेंगे.
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