रांची : विधानसभा भवन के काम में विचलन कर ठेकेदार को 15 करोड़ का अधिक भुगतान

शकील अख्तर ऑडिट के बाद सरकार को भेजी गयी रिपोर्ट में किया गया है उल्लेख रांची : झारखंड विधानसभा के नये भवन निर्माण के दौरान इंजीनियरों ने अपने अधिकार से बाहर जा कर 15.00 से 2377 प्रतिशत तक विचलन किया है.साथ ही इसके बदले ठेकेदार को 15.53 करोड़ रुपये का अधिक भुगतान किया है. विधानसभा […]

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शकील अख्तर
ऑडिट के बाद सरकार को भेजी गयी रिपोर्ट में किया गया है उल्लेख
रांची : झारखंड विधानसभा के नये भवन निर्माण के दौरान इंजीनियरों ने अपने अधिकार से बाहर जा कर 15.00 से 2377 प्रतिशत तक विचलन किया है.साथ ही इसके बदले ठेकेदार को 15.53 करोड़ रुपये का अधिक भुगतान किया है. विधानसभा के निर्माण में लगाये जा रहे लघु खनिज जैसे चिप्स, बालू आदि का स्रोत भी वैध नहीं है. विधानसभा कांप्लेक्स के निर्माण के ऑडिट के बाद सरकार को भेजी गयी रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है.
सक्षम पदाधिकारी से अनुमति लिये बिना ही किया भुगतान : रिपोर्ट में कहा गया है कि साइट डिजाइन में बदलाव के नाम पर विचलन किया गया है. नियमानुसार इस विचलन से जुड़े कार्यों के भुगतान के लिए सक्षम पदाधिकारी की अनुमति जरूरी है.
लेकिन कार्यपालक अभियंता से डेविएशन के मामले में सक्षम पदाधिकारी से अनुमति लिये बिना ही 15.30 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया. इस मामले में मिट्टी खुदाई के सिलसिले में 610 प्रतिशत, लैंड डेवलपमेंट में 85 प्रतिशत और एग्रीमेंट के आइटम नंबर 256.2 में 2377 प्रतिशत के विचलन को बतौर उदाहरण पेश किया गया है.
मिट्टी कटाई के काम में डेविएशन की वजह से 6.83 करोड़ रुपये, ढुलाई में दूरी बढ़ाने की वजह से 8.21 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान ठेकेदार को किया गया. रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि इस तरह के विचलन के सिलसिले में पूछे जाने पर कार्यपालक अभियंता ने यह कहा कि निर्माण स्थल की जमीन की स्थिति, डिजाइन में किये गये बदलाव और प्लिंथ लेवल बढ़नेे की वजह से डेविएशन की जरूरत पड़ी.
लघु खनिजों के इस्तेमाल पर उठाये सवाल : रिपोर्ट में निर्माण कार्य में इस्तेमाल किये जा रहे लघु खनिज जैसे चिप्स, बालू आदि के स्रोत पर भी सवाल उठाया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि माइनर मिनरल कंसेशन रूल में इस बात की प्रावधान किया गया है कि निर्माण कार्य में प्रयुक्त की जानेवाली लघु खनिजों के सिलसिले में ठेकेदार द्वारा फार्म ‘पी’ और फार्म ‘ओ’ दिया जायेगा. सत्यापन के लिए इसे खान भूतत्व विभाग को भेजा जायेगा. संबंधित विभाग जांच पड़ताल के बाद यह बतायेगा कि खनिजों का स्रोत वैध है या नहीं.
खान भूतत्व विभाग द्वारा फार्म ‘पी’ और फार्म ‘ओ’ का सत्यापन करने तक ठेकेदार से रायल्टी की दोगुनी राशि वसूली जायेगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑडिट के दौरान यह पाया गया कि ठेकेदार ने फार्म ‘पी’ और फार्म ‘ओ’ जमा नहीं किया है. हालांकि उससे रायल्टी की दोगुनी राशि वसूली गयी है. फार्म ‘पी’ और फार्म ‘ओ’ के नहीं होने यह सत्यापित नहीं किया जा सका कि निर्माण कार्य में प्रयुक्त खनिज वैध स्रोत से ही लाये गये हैं.
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