रांची : राज्य में प्रथम चरण में स्कूलों के विलय के बाद अब दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. प्रथम चरण में 4600 स्कूलों का विलय किया गया. इसका सकारात्मक असर पठन-पाठन पर पड़ा है. विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति बढ़ गयी है. शिक्षकों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई. दूसरे चरण में 6466 मध्य विद्यालय का चयन किया गया है.
यह जानकारी गुरुवार को मीडिया कार्यशाला में स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव एपी सिंह ने दी. विलय के लिए चिह्नित किये गये विद्यालयों में 411 विद्यालय में दस से कम, 1427 विद्यालय में 10 से 30, 1894 विद्यालय में 30 से 50 व 2734 स्कूल में 50 से 100 के बीच विद्यार्थी हैं. ऐसे विद्यालयों का विलय हाइस्कूल में किया जायेगा. किसी हाइस्कूल के पांच किलोमीटर के दायरे के वैसे मध्य विद्यालय, जिनमें 100 से कम बच्चे हैं, उन्हें चरणबद्ध तरीके से विलय किया जायेगा.
प्रथम चरण में वैसे विद्यालय, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 50 से कम है, उनका विलय किया जायेगा. प्रधान सचिव ने बताया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत एक मध्य विद्यालय में तीन स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक का होना अनिवार्य है. ऐसे में वैसे विद्यालय, जिनमें दस से भी कम बच्चे हैं, उन विद्यालयों के लिए भी तीन स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक की नियुक्ति अनिवार्य होगी. दस से कम बच्चों को पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक की नियुक्ति होने पर सालाना 18 लाख रुपये खर्च आयेगा. विद्यालयाें के विलय के पूर्व हाइस्कूल में उपलब्ध संसाधन की जांच की जायेगी. यह देखा जायेगा कि हाइस्कूल में पर्याप्त संख्या में कमरा व अन्य संसाधन हैं कि नहीं हैं.
जिन विद्यालयों का होगा विलय, उनके बच्चे को साइकिल : जिन मध्य विद्यालयों का विलय हाइस्कूल में किया जायेगा, उनके कक्षा छह व सात के बच्चों को साइकिल दी जायेगी. वर्तमान में केवल कक्षा अाठ के विद्यार्थियों को साइकिल दी जाती है. इसके अलावा आवश्यकता होने पर सरकार बच्चों को स्कूल आने के लिए यात्रा भत्ता भी देगी, पर बच्चे को स्कूल भेजने की व्यवस्था अभिभावक को करना होगा. विद्यालयों के विलय का आवश्यक दिशा-निर्देश जिलों को दे दिया गया है.
विलय के बाद 96% बच्चे जा रहे स्कूल
रांची : राज्य के 4600 स्कूलों के विलय की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है. इन विद्यालयों के लगभग दो लाख बच्चों का नामांकन निकट के मर्ज किये गये विद्यालय में हो गया है. इनमें से 96 फीसदी बच्चे विद्यालय जा रहे हैं.
जिन 4600 विद्यालयों का विलय किया गया, उनमें से मात्र 150 विद्यालय ऐसे थे, जिनके बच्चों के मर्ज किये गये विद्यालय में नामांकन को लेकर परेशानी की बात सामने आयी. इसके बाद अधिकारी विद्यालय गये, बच्चों व अभिभावकों से बात की. 150 में से भी 90 फीसदी स्कूलों के बच्चों का नामांकन करा दिया गया.
वैसे विद्यालय जिन्हें मर्ज करने से बच्चों को अधिक परेशानी होती, उन विद्यालयों को छोड़ दिया गया. यह बातें राज्य परियोजना निदेशक उमा शंकर सिंह ने गुरुवार को मीडिया कार्यशाला में कही. उन्होंने कहा कि विद्यालयों के विलय में पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है. विद्यालय स्तर से लेकर जिला प्रारंभिक शिक्षा समिति की सहमति के बाद ही विद्यालय का विलय हुआ है. विद्यालयों के विलय से स्कूलों में बच्चों की उपस्थित बढ़ी है. विद्यालय के विलय से लगभग 400 करोड़ की बचत हुई है.
विद्यालय में शिक्षकों की संख्या भी बढ़ी है. इससे पठन-पाठन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है. आइआइएम रांची को विद्यालय के विलय के बाद की स्थिति का अध्ययन करने के लिए कहा गया है. जिन विद्यालयों का विलय किया गया है, उसके खाली पड़े भवन में आंगनबाड़ी केंद्र खोला जायेगा. राजस्व विभाग ने भी ऐसे भवनों की मांग की है.
राज्य की 21 पंचायतों में 20 से अधिक स्कूल: राज्य परियोजना निदेशक ने कहा कि भारत में चीन की तुलना में छह गुणा अधिक स्कूल हैं. भारत में 15,22,346 विद्यालय, तो चीन में 2,66,833 विद्यालय हैं. उन्होंने कहा कि विद्यालय के विलय के बाद भी झारखंड में 21 ऐसे पंचायतें हैं, जहां 20 से अधिक विद्यालय हैं.
