रांची : रिम्स स्थित चर्म एवं यौन रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ डीके मिश्रा के चेंबर में गुरुवार को हुई घटना के आरोपी बरगांवा, नामकुम निवासी संदीप उरांव के खिलाफ पुलिस ने अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की है.
इसके बावजूद वह कैद में है. संदीप को रिम्स के कैदी वार्ड में रखा गया है. इस संबंध में बरियातू थाना प्रभारी अजय केसरी ने कहा कि आरोपी युवक को सुरक्षा के लिहाज से कैदी वार्ड में रखा गया है. शनिवार को उसे इलाज के लिए रिनपास भेजा जायेगा.
गौरतलब है कि डॉ डीके मिश्रा के चेंबर में गुरुवार को खून का धब्बा, दीवार पर खून से कुछ लाइन लिखी होने और पंखे से फांसी का फंदा मिलने के बाद सनसनी फैल गयी थी. लेकिन, कोई शव नहीं मिला. इसकी सूचना मिलते ही सिटी एसपी सुजाता वीणापाणि पूरे दलबल के साथ मौके पर पहुंचीं.
एफएसएल की टीम को भी मौके पर बुलाया गया. पुलिस, एफएसएल की टीम और पूरा रिम्स प्रबंधन दिन भर हलकान रहे. जांच के क्रम में कमरे में एक जैकेट मिला, जिसमें एक गेट पास निकला.
यह जैकेट मेडिसिन विभाग के डॉ विद्यापति की यूनिट में भर्ती बिरसा उरांव के छोटे पुत्र संदीप का था. पुलिस उस तक पहुंची और पूरे मामले का पटाक्षेप हो गया. पूछताछ में पता चला कि संदीप मानसिक रूप से विक्षिप्त है और उसने डॉ मिश्रा के चेंबर में घुसकर आत्महत्या की कोशिश की थी. साथ ही दीवार पर खून से आपत्तिजनक शब्द लिखे थे.
आज होगा मेडिकल बोर्ड
संदीप के इलाज के लिए शनिवार को मेडिकल बोर्ड होगा. रिम्स में उसका इलाज सर्जन डॉ विनय प्रताप और मनोचिकित्सा के विभागाध्यक्ष डॉ अशोक प्रसाद कर रहे हैं. उसके गले में मामूली जख्म है. जबकि, सिर में तीन टांके लगाये गये हैं. डॉ प्रताप के अनुसार उसकी स्थिति ठीक है.
वहीं, डॉ प्रसाद ने बताया कि संदीप ने स्वीकार किया है कि वह तीन दिनों से शराब नहीं पी रहा था. डॉ प्रसाद के अनुसार नशे का आदी व्यक्ति जब नशा छोड़ देता है, तो उसके मन में कभी-कभी आत्महत्या का विचार आने लगता है.
डॉक्टरों में तरह-तरह की चर्चा
रिम्स के डॉक्टरों में गुरुवार की घटना को लेकर तरह तरह की चर्चा हो रही थी. डॉक्टरों का कहना था कि युवक के गले में बहुत ही मामूली जख्म (सुपर फेशियल) है. सिर में भी हल्की चोट है. यह घाव भी ऐसी जगह पर हुआ है, जहां खुद से जख्म देना मुश्किल है.
जबकि, चेंबर में जिस हिसाब से खून बिखरा था, उससे साफ लग रहा था कि किसी को बड़ा जख्म हुआ है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इतने मामूली जख्म से उतना खून कैसे निकला. डॉक्टरों का कहना है कि कहीं न कहीं कुछ मामला जरूर है.
