रिम्स में हॉस्टल का अभाव झेल रही छात्राओं के लिए होगी नयी व्यवस्था
रांची : रिम्स के गर्ल्स हॉस्टल के एक कमरे में 10 से 12 छात्राएं रह रही हैं. जबकि, ब्वॉयज हॉस्टल के एक कमरे में एक छात्र रह रहा है. वहीं, छात्राएं हॉस्टल में मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी कई अन्य समस्याएं भी झेल रही हैं. मंगलवार दोपहर एक बजे हॉस्टल के मुद्दे को लेकर हुई बैठक में रिम्स निदेशक डॉ डीके सिंह को जब यह जानकारी मिली, तो वे चौंक गये.
हालांकि, उन्होंने तत्काल इस समस्या का हल भी निकाल लिया.बैठक में ब्वॉयज हॉस्टल और गर्ल्स हॉस्टल के वार्डन भी मौजूद थे. गर्ल्स हॉस्टल की वार्डन ने रिम्स निदेशक को बताया कि हॉस्टल के कमरे ठीक नहीं है. सीपेज के कारण दीवारें खराब हो गयी हैं. पानी की भी समस्या है. ब्वायज हॉस्टल के एक कमरे में एक छात्र है, जबकि गर्ल्स हॉस्टल के एक कमरे में 10 से 12 लड़कियां रह रही हैं.
इस पर निदेशक ने कहा कि जब हर साल छात्राआें की संख्या बढ़ रही है, तो क्यों नहीं ब्वायज हॉस्टल को गर्ल्स हॉस्टल में तब्दील कर दिया जाये. रही सुरक्षा की बात है, तो गर्ल्स हॉस्टल की जरूरत के हिसाब से सुरक्षा आदि की व्यवस्था की जायेगी. सुरक्षाकर्मियों की नियुक्ति की जायेगी, दीवारें ऊंची करवायी जायेंगी और गार्डवायर भी लगा दिया जायेगा.
ये है मौजूदा स्थिति
रिम्स के एमबीबीएस और डेंटल में छात्राओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है. सत्र 2018 में एमबीबीएस के 150 सीटों पर 80 से ज्यादा छात्राओं का नामांकन हुआ है. यही हाल राज्य के पहले सरकारी डेंटल कॉलेज का है. यहां सत्र 2018 में 50 सीटों में से 38 पर छात्राओं का नामांकन हुआ है. ऐसे में हॉस्टल की समस्या होना लाजमी है. छात्राएं जैसे-तैसे हॉस्टल में रह रही हैं. उन्हें पढ़ाई करने में भी परेशानी होती है.
जल्द ही ब्वाॅयज और गर्ल्स हॉस्टल का निरीक्षण करेंगे निदेशक : रिम्स निदेशक ने कहा कि वे जल्द ही ब्वाॅयज और गर्ल्स हॉस्टल का निरीक्षण कर समस्याओं का जायजा लेंगे. व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जो भी जरूरी फेरबदल करने होंगे, किये जायेंगे. इसके बाद वह दोबारा हॉस्टल कमेटी के साथ बैठक करेंगे. इसके अलावा 500 बेड के नवनिर्मित हॉस्टल के हस्तांतरण में क्या तकनीकी समस्या आ रही है, उसका भी अवलोकन किया जायेगा.
सर्जरी विभाग में सिर्फ नाम का है आइसीयू
रिम्स के सर्जरी विभाग सहित कई विभागों ने मंगलवार को निदेशक डाॅ डीके सिंह के सामने अपना प्रेजेंटेशन दिया. सर्जरी के विभागाध्यक्ष डाॅ आरजी बाखला ने प्रेजेंटेशन में बताया कि उनके विभाग में सबसे बड़ी समस्या आइसीयू की है.
विभाग में फिलहाल जो आइसीयू है, वह सिर्फ नाम का है. आइसीयू में जरूरी सुविधाएं नहीं हैं. किसी तरह गंभीर मरीजों को भर्ती करके रखा जाता है. इस पर निदेशक ने कहा कि वर्तमान में आपस सभी को उसी व्यवस्था में काम करना होगा. इसके बाद सीनियर रेजीडेंट के पद को 10 से बढ़ा कर 16 करने की मां भी की गयी.
