उत्तम महतो
रांची : रांची की लाइफ लाइन हरमू नदी का भयानक रूप से प्रदूषित हो गयी है.नदी को प्रदूषण से बचाने के उपाय कारगर नहीं सिद्ध हो रहे हैं. हर दिन लाखों लीटर गंदा पानी नालियों के जरिये सीधे हरमू नदी में गिरता है. हरमू नदी में आठ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाये जाने थे. उनमें से सात प्लांट ने काम करना शुरू कर दिया है. लेकिन, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता जरूरत के मुताबिक कम है.कुल मिलाकर जीर्णोद्धार पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी हरमू नदी की न सूरत नहीं बदली जा सकी है.
इटकी के पास से निकलकर स्वर्णरेखा में मिलनेवाली हरमू नदी के दोनों ओर तेजी से आबादी भी बढ़ी. नदी क्षेत्र के लगातार होता अतिक्रमण बरसाती पानी के नदी तक पहुंचनेवाले मार्ग में बाधक बनने लगा. धीरे-धीरे नदी में पानी भी कम होता गया. अब घरों से निकलनेवाले गंदे पानी और सीवरेज ने नदी को पूरी तरह नाले में तब्दील कर दिया है.
सौंदर्यीकरण के लिए नदी की चौड़ाई को कम करने से नदी की स्थिति और खराब हुई है. नदी के उद्गम स्थल पर अब तक ध्यान नहीं दिया गया है. सौंदर्यीकरण से पूर्व नदी का जियोलॉजिकल और टोपोग्राफिकल सर्वे की जरूरत नहीं समझी गयी है. प्राकृतिक उद्गम स्थल काे विकसित करने की कोई योजना नहीं है. ऐसे में हरमू नदी में केवल घरों से निकलने वाला गंदा पानी गिर रहा है.
मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है हरमू नदी का सौंदर्यीकरण
नाले का रूप ले चुकी हरमू नदी का जीर्णोद्धार जिसे सौंदर्यीकरण भी कहा जा रहा है, दरअसल मुख्यमंत्री रघुवर दास का ड्रीम प्रोजेक्ट है. इस कार्य का शिलान्यास 15 मार्च 2015 काे हुआ था. बीतते समय में इसकी गणना करें, तो तीन साल आठ महीने और 18 दिन पहले यह काम शुरू हुआ था.
राज्य सरकार ने इसके लिए मुंबई की कंपनी ईगल इंफ्रा के साथ करार किया. करार के मुताबिक हरमू नदी का सौंदर्यीकरण 36 महीने 16 में (31 मार्च 2018 तक) पूरा करना था. यह डेड लाइन भी खत्म हो चुकी है, लेकिन हरमू नदी की तसवीर नहीं बदली है. जहां-तहां काम तो हो रहे हैं, लेकिन काम की रफ्तार काफी धीमी है. एेसे में यह कहना मुश्किल है कि सौंदर्यीकरण का काम कब पूरा होगा.
