रांची : चेहल्लुम का जुलूस निकला, जंजीरी मातम

रांची : शिया समुदाय की अोर से चेहल्लुम के अवसर पर मंगलवार को काली मंदिर चौक के समीप जंजीरी मातम का आयोजन किया गया. नन्हे बच्चों से लेकर युवकों ने हाथों में ब्लेड व जंजीर में चाकू बांध कर या हुसैन हाय हुसैन कहते हुए अपने शरीर को लहूलुहान कर लिया इसे देखने के लिए […]

रांची : शिया समुदाय की अोर से चेहल्लुम के अवसर पर मंगलवार को काली मंदिर चौक के समीप जंजीरी मातम का आयोजन किया गया. नन्हे बच्चों से लेकर युवकों ने हाथों में ब्लेड व जंजीर में चाकू बांध कर या हुसैन हाय हुसैन कहते हुए अपने शरीर को लहूलुहान कर लिया
इसे देखने के लिए काली मंदिर चौक के समीप लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. नोहा में जैसे-जैसे दर्द भरे अशआर (शेर) : उस बेकफन का, जो नवासा है रसूल ए जमन का… कर्बला क्या है, अजब नहीं कि वो कह देंगे कल खुदा क्या है…. अलम देखो अलम की शान देखो, मैं हूं शब्बीर से, शब्बीर मुझसे, रसूलुल्लाह का ऐलान देखो… सुनाये जा रहे थे, वैसे-वैसे अजादार अपना-अपना शरीर पीट-पीट कर रो रहे थे. वहीं, महिलाएं भी मातम मना रही थीं. नोहा कासिम अली और बाकर रजा ने अशआर पढ़े.
इससे पूर्व अलम व ताबूत के साथ मातमी जुलूस अनवर टावर विश्वकर्मा मंदिर लेन से निकल कर अंजुमन प्लाजा, मेन रोड, चर्च रोड होते हुए कर्बला चौक स्थित कर्बला में जाकर संपन्न हुआ. मौलाना सैयद नसीरुल हसन ने कहा कि इमाम हुसैन का गम इसलिए मनाते हैं कि पूरे मुसलमानों के रसूल अजीज थे और रसूल के लिए इमाम हुसैन अजीज थे.
जुलूस में मौलाना जहीन हैदर, मौलाना नसीरुल हसन, शबीह गोपालपुरी, डॉ शमीम हैदर, डॉ शीन अख्तर, डॉ गजनफर अब्बास, सैयद मेंहदी इमाम, डॉ बादशाह, डॉ एसएम अब्बास, सैयद तनवीर अनवर, एहतेशाम काजमी, नेहाल हुसैन, एहतेशाम अब्बास, अशरफ हुसैन के अलावा सैयद अली रजा अब्बास , जिशान अली हैदर , जाफर अली, अरमान हैदर , अरमान रजा सहित काफी संख्या में छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल थे. वे भी बड़ों को देख कर अपनी-अपनी छाती पीटकर मातम मनाते हुए चल रहे थे.

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