रांची: गरमी बढ़ने के साथ ही राज्य में बिजली के ट्रांसफारमर भी जल रहे हैं. स्थिति यह है कि इस समय राज्य भर में 400 से अधिक ट्रांसफारमर जले हुए हैं. यदि एक ट्रांसफारमर से औसतन सौ घरों बिजली जाती है, तो इस हिसाब से राज्य भर में 40 हजार घरों बिजली नहीं है. लगातार ट्रांसफारमर जलने से लोग परेशान हैं. बोर्ड के अधिकारी भी मानते हैं कि गरमी में लोड ज्यादा बढ़ता है, जिसके चलते ट्रांसफारमर जलने की दर बढ़ जाती है.
क्यों जलते हैं ट्रांसफारमर : गरमी में ट्रांसफारमर बाहर के तापमान से भी गरम हो जाता है. दूसरी ओर सौ केवीए का एक ट्रांसफारमर है तो इसमें लोड बढ़ कर डेढ़ सौ से 200 केवीए हो जाता है. क्षमता से अधिक लोड होने की वजह से ट्रांसफॉरमर जल जाता है.
छह महीने से खरीदारी नहीं : बिजली बोर्ड को बांट कर अलग-अलग चार कंपनियां बना दी गयी, पर इसके निदेशक मंडल का गठन नहीं किया गया था. इससेबोर्ड में सारी खरीदारी बंद हो गयी. तार और ट्रांसफॉरमर की खरीदारी भी नहीं हो पा रही है.
एसी और कूलर का बढ़ना मुख्य वजह : वर्मा
हाल के दिनों में एसी और कूलर की बिक्री में चार गुणा इजाफा हुआ है. अब सामान्य लोग भी घरों में एसी लगाने लगे हैं. एक एसी का लोड दो हजार वाट तक होता है. ट्रांसफॉरमर पर अत्यधिक लोड बढ़ने से जलने का खतरा बढ़ जाता है. गरमी में यह ज्यादा होता है. जैसे-जैसे गरमी बढ़ती जा रही है बिजली की मांग भी बढ़ती जा रही है. पूरे देश में यह समस्या है. इसके बावजूद रांची में दिल्ली और मुंबई की तुलना में काफी कम दो से तीन घंटे ही कटौती हो रही है.
एसएन वर्मा, सीएमडी, झारखंड ऊर्जा विकास निगम
