रांची से सुनील चौधरी की रिपोर्ट
Ranchi News: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भाजपा के स्थापना दिवस पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि पार्टी अपनी मूल पहचान से दूर होती जा रही है. झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा आज अपना स्थापना दिवस भले ही भव्य तरीके से मना रही हो, लेकिन उसकी आंतरिक स्थिति चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि कभी पार्टी की ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता और जमीनी नेता हुआ करते थे, लेकिन आज वही लोग हाशिये पर धकेल दिए गए हैं. वर्तमान समय में भाजपा में विचारधारा से ज्यादा बाहरी चेहरों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है. बाहर से आए नेताओं को शीर्ष पदों पर बैठाया जा रहा है, जबकि वर्षों तक पार्टी को खड़ा करने वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं की आवाज दबाई जा रही है. विनोद पांडेय ने कहा कि अपने ही दल के पूर्व मुख्यमंत्रियों, वरिष्ठ नेताओं और लंबे समय तक संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार करना केवल एक चूक नहीं, बल्कि पार्टी की सोच में आए बदलाव का संकेत है
संगठन में केंद्रीकरण और आंतरिक लोकतंत्र पर सवाल
विनोद पांडेय ने पूछा कि क्या एक राजनीतिक दल सिर्फ संसाधनों और प्रचार से मजबूत होता है या फिर उसकी असली ताकत उसके कार्यकर्ताओं, उसके मूल सिद्धांतों और उसकी आंतरिक लोकतांत्रिक संस्कृति में होती है. दुर्भाग्य से आज जो तस्वीर दिख रही है उसमें समर्पण की जगह अवसरवाद और संगठन की जगह केंद्रीकरण ने ले ली है. बाहरी प्रभावों ने पार्टी की जड़ों को कमजोर कर दिया है. लोकतंत्र में दल सिर्फ चुनाव जीतने का माध्यम नहीं होते, बल्कि विचार और विश्वास का मंच होते हैं. जब वही मंच अपने ही लोगों के लिए संकुचित हो जाए, तो जश्न भले भव्य हो पर आत्मा कहीं खो जाती है.
विकास के दावों और बयानों पर प्रतिक्रिया
श्री पांडेय ने कहा कि भाजपा नेताओं के भाषण पूरी तरह आत्मप्रशंसा से भरे हैं, जबकि जमीनी सच्चाई इससे अलग है. उन्होंने कहा कि भाजपा देश और राज्य में विकास की बात तो करती है, लेकिन हकीकत में महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों पर पूरी तरह विफल रही है. उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दूसरों पर हंसने से पहले भाजपा को अपने वादों का हिसाब देना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नीतियों के कारण आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा, देश में आर्थिक असमानता बढ़ी है और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित हुए हैं.
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