रांची : हिंसा से विकास नहीं होता और न ही अलगाववाद महान बनाता

राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में पत्थलगड़ी और उसके सामाजिक प्रभाव विषय पर संगोष्ठी में बोले इंद्रेश रांची : राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच सह मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने कहा कि ग्रामसभा को ईश्वर का रूप और न्याय की अवधारणा कहा गया है़ यह हिंसक, वैमनस्यवादी, अधिनायकवादी और एकाकीपन में जीकर गांव का […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में पत्थलगड़ी और उसके सामाजिक प्रभाव विषय पर संगोष्ठी में बोले इंद्रेश
रांची : राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच सह मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने कहा कि ग्रामसभा को ईश्वर का रूप और न्याय की अवधारणा कहा गया है़ यह हिंसक, वैमनस्यवादी, अधिनायकवादी और एकाकीपन में जीकर गांव का गला घोटने वाला नहीं हो सकता. ग्रामसभा का काम संकट का समाधान निकालना, मानवीय समस्याओं व झगड़ों का निबटारा करना है, जिसे ईश्वरीय कार्य माना जाता है़
इसलिए गलत से समझौता कर शैतान को पनपने का मौका न दे़ं हिंसा से किसी का विकास नहीं होता, न ही अलगाववाद किसी को महान बनाता है़ हम सब विराट के रूप हैं, इस सत्य को स्वीकारना चाहिए़ वे राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच व जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग द्वारा ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में पत्थलगड़ी और उसके सामाजिक प्रभाव विषयक संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे़ यह आयोजन शनिवार को रांची विवि के शहीद स्मृति सभागार, मोरहाबादी में हुआ़
श्री कुमार ने कहा कि आज संकट खड़ा हो गया है कि मैं जिस गांव में जन्मा वही मेरा है़ यदि कोई कहे कि हम कहीं जायेंगे नहीं, न किसी को आने देंगे, तो इसका अर्थ है कि ईश्वर से कट गये. समाज, शिक्षा, दवा, अस्पताल, विकास, रोजगार से कट गये. देश को तोड़नेवाले चाहते हैं कि हम लड़ कर रहे़ं अब यह हमें तय करना है कि लड़ कर रहना है कि मिल कर. यदि दिमाग में कट्टरता, अलगाववाद और हिंसा होगी, तो यह बात समझ नहीं पायेंगे़
उन्होंने कहा कि इतिहास जानने के रास्ते हैं. पहले कागज नहीं थे़ ताड़ पत्र होते थे, पत्थरों पर लिखा जाता था, जिसका स्थानीय नाम पत्थलगड़ी है़ इसमें गांव के इतिहास, गांव के प्रमुख लोगों के नाम, गांव का चरित्र, संपदा-गुण आदि लिखे जाते थे़ मान्यताओं के मंत्र लिखे जाते थे़ इनसे स्थानिक आस्था, चरित्र व जीवन की जानकारी मिलती थी़
इसमें यह नहीं लिखा होता था ‘बस यही.’ यह शैतान लिखता है, इंसान नहीं लिख सकता़ अधूरे शोध और नकल से सत्य नहीं चलता़ परंपराओं को कलंकित न करे़ं, उसमेें गिरावट न आने दे़ं यह गांव के हर आदमी का काम है़ इस अवसर पर दिव्यांशु की पुस्तक परंपरा की पत्थलगड़ी बनाम बहकावे का शिलालेख का लोकार्पण भी हुआ़ कार्यक्रम में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि के वीसी डॉ सत्यनारायण मुंडा, रांची विवि के वीसी डॉ रमेश कुमार पांडेय, प्रो वीसी डॉ कामिनी कुमार, गोलक बिहारी, कुलसचिव डॉ अमर कुमार चौधरी, मुसलिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ शाहिद अख्तर, बिरसा कॉलेज खूंटी की प्रभारी प्राचार्या डॉ नेलन पूर्ति व अन्य मौजूद थे़
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

👤 By Prabhat Khabar Digital Desk

Prabhat Khabar Digital Desk

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >