बिजली आपूर्ति करनेवाली बुधिया कंपनी के निदेशक थे बासुदेव बुधिया

अरुण बुधिया रांची के सुप्रसिद्ध बुधिया परिवार के सबसे वरिष्ठ सदस्य बासुदेव प्रसाद बुधिया का निधन बुधवार को हो गया. उनका जन्म 13 नवंबर 1933 में हुआ था. वे मदन लाल बुधिया के द्वितीय पुत्र थे. जीवनपर्यंत समाज सेवा में आगे रहे. सरकारीकरण के पहले विद्युत आपूर्ति बुधिया परिवार की ही कंपनी के जिम्मे थी, […]

अरुण बुधिया
रांची के सुप्रसिद्ध बुधिया परिवार के सबसे वरिष्ठ सदस्य बासुदेव प्रसाद बुधिया का निधन बुधवार को हो गया. उनका जन्म 13 नवंबर 1933 में हुआ था. वे मदन लाल बुधिया के द्वितीय पुत्र थे. जीवनपर्यंत समाज सेवा में आगे रहे. सरकारीकरण के पहले विद्युत आपूर्ति बुधिया परिवार की ही कंपनी के जिम्मे थी, जिसके वे निदेशक भी थे. शहर व समाज के किसी व्यक्ति को कोई भी आवश्यकता होती थी, तो वे हमेशा सहयोग के लिए तैयार रहते थे. उनका विवाह शकुंतला देवी के साथ हुआ था. एक पुत्री एवं तीन पुत्र, दो पौत्र, दो पौत्रियां, दो नतिनी का उनका भरा-पूरा परिवार है.
रांची गोशाला, संतूलाल पुस्तकालय, बुधिया दातव्य औषधालय, संस्कृत विद्यालय, मारवाड़ी शिक्षा ट्रस्ट, चांदमल बाल मंदिर, अग्रवाल सभा, मारवाड़ी सहायक समिति, अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन, अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन और झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन में विभिन्न दायित्वों पर रह कर उन्होंने समाज की सेवा की.
एकीकृत बिहार से झारखंड अलग राज्य बनने पर समाज को संगठित करने के लिए झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन की स्थापना में सक्रिय योगदान दिया अौर इसके संस्थापक अध्यक्ष बने. अग्रवाल सभा ने उनकी नि:स्वार्थ सेवाओं को देखते हुए वर्ष 2005 में उन्हें अग्रवाल सभा के सर्वोच्च सम्मान अग्रसेन सम्मान से सम्मानित किया.
बासुदेव प्रसाद बुधिया सरल-मृदुभाषी तथा कार्यकर्ता के रूप में सदैव याद किये जायेंगे. बिना पद की लालसा से निरंतर संयुक्त बिहार, झारखंड विशेष कर रांची के समाजसेवियों को आगे बढ़ा कर उन्होंने सर्वोच्च पदों पर आसीन किया. मारवाड़ी समाज के चिंतक स्व गंगा प्रसाद बुधिया के पदचिह्नों पर चलते हुए शिक्षा, चिकित्सा तथा समाज को संगठित करने के लिए वे प्रेरणा के स्रोत बने रहे. उनके निधन से समाज ने अपना एक अभिभावक खो दिया है.

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