रांची : आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने कहा है कि मंडल आयोग से सामाजिक, राजनीतिक तानाबाना पर बदलाव का व्यापक असर पड़ा, लेकिन झारखंड सामाजिक न्याय से वंचित होता रहा.
मंडल कमीशन के सूत्रधार बीपी मंडल की जन्मशती पर उन्हें नमन करते हुए श्री महतो ने इस जरूरत पर भी जोर दिया है कि पिछड़ों को मिलनेवाले सामाजिक न्याय की कसौटी पर झारखंड क्यों पिछड़ता रहा. उन्होंने कहा है कि यही वक्त है कि सरकार तथा सामाजिक न्याय की वकालत करनेवाले इन बातों को परखें कि मंडल की सिफारिशों ने झारखंड के पिछड़ा वर्ग को कितना सशक्त बनाया.
श्री महतो ने सवाल किया है कि झारखंड में पिछड़ी जातियों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग कई स्तरों पर होती रही है, लेकिन इसे अमलीजामा नहीं पहनाया गया आखिर क्यों? 13 अगस्त को केंद्र की बीपी सिंह की सरकार ने मंडल कमीशन की अनुशंसाओं के आधार पर पिछड़े वर्ग को सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण देने की अधिसूचना जारी की थी.
एकीकृत बिहार में भी पिछड़ी जातियों को 26 प्रतिशत आरक्षण मिला हुआ था, लेकिन अलग और अपने राज्य में ही पिछड़ों का आरक्षण 14 प्रतिशत पर लाकर छोड़ दिया गया. जबकि देश के दूसरे कई राज्यों गुजरात, कर्नाटक, केरल, तमिलनाड़ु, उत्तरप्रदेश में पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत या उससे अधिक आरक्षण हासिल है.
सरकारी नौकरियों में आरक्षण के अलावा मंडल आयोग की प्रमुख सिफारिशों में यह भी शामिल था कि भूमि सुधार कानून लागू किया जाये, क्योंकि पिछड़े वर्गों का सबसे बड़ा दुश्मन जमींदारी प्रथा थी.
