रांची में 27 सितंबर से होगा राष्ट्रवादी चिंतक, कलाकार व बुद्धिजीवियों का महाजुटान
30 तक चलेगा आयोजन, भारत बोध : जन, गण, मन होगा मुख्य विषय, कई सत्रों में आयोजित होगा कार्यक्रम
राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित देश के जाने-माने राष्ट्रवादी चिंतक, साहित्यकार, अर्थशास्त्री लेंगे हिस्सा
रांची : राष्ट्रवादी चिंतकों, कर्मशील कलाकारों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का महाजुटान राजधानी में होगा़ 27 सितंबर से राजधानी के खेलगांव परिसर में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा लोकमंथन कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा़
समागम में चिंतकों के विश्लेषण, परिचर्चा का मुख्य विषय भारत बोध-जन, गण, मण होगा़ प्रज्ञा प्रवाह और लोकमंथन के महासचिव जे नंद कुमार ने पत्रकारों को बताया कि उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू इस महासम्मेलन का उदघाटन करेंगे़ 30 सितंबर को समापन के मौके पर लोकसभा की अध्यक्ष सुमित्रा महाजन पहुंचेंगी़
समागम में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, मुख्यमंत्री रघुवर दास, देश के जाने-माने प्रबुद्धगण जैसे रंगा हरि, पद्मश्री अशोक भगत, डेविड फ्राले, स्वामी नरसिंहानंद, डॉ माधव चित्तले, डॉ विनय सहस्त्रबुद्धे, संजीव सान्याल, डॉ बजरंग गुप्ता, डॉ कनगसभापति शामिल होंगे़
श्री कुमार ने बताया कि वर्ष 2016 में भोपाल के बाद दूसरी बार लोकमंथन का कार्यक्रम रांची में आयोजित किया जा रहा है़ यह समागम कला, विज्ञान से लेकर पर्यावरण तक भारतीय चिंतन और परिप्रेक्ष्य पर चर्चा-परिचर्चा और मनन करेगा़ इसके साथ ही इसका उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रवादी और कर्मशीलों को एक मंच पर लाना है़ उन्होंने कहा कि भारतीय मन का उपनिवेशिकता की मुक्ति के साथ राष्ट्रवादी चिंतन हर क्षेत्र में लाना लक्ष्य है़ आज शिक्षा से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में अभारतीय दृष्टिकोण से विश्लेषण हो रहा है़ इस महासम्मेलन का विषय भारत बोध, इससे ही जुड़ा है़
कला, विज्ञान, पर्यावरण से लेकर सभी जगह भारतीय चिंतन पैदा करना है़ उन्होंने बताया कि तीन दिनों तक लगातार परिचर्चा, कलाकृतियों का प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे़ समाज अवलोकन और अर्थावलोकन विषयों पर परिचर्चा होगी़ आखिरी दिन आत्मा अवलोकन होगा़ मौके पर मंत्री अमर बाउरी, आयोजन समिति के पदाधिकारी व सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति नंद कुमार इंदू, मयंक रंजन, राजीव कमल बिट्टू मौजूद थे़
झारखंडी संस्कृति और साहित्य भी समागम के विषय
कला संस्कृति व खेलकूद मंत्री अमर बाउरी ने कहा कि इस कार्यक्रम में सरकार का कला संस्कृति विभाग भी जुटा है़ इस कार्यक्रम में राज्य के विश्वविद्यालय भी जुड़े हैं. आयोजन समिति में सभी विश्वविद्यालय के कुलपति शामिल हैं. मंत्री ने कहा कि महासम्मेलन में झारखंडी संस्कृति और साहित्य की भी झलक मिलेगी़ झारखंड के कई साहित्यकार व प्रबुद्ध लोग इसमें शामिल होंगे़ झारखंड में इस आयोजन को लेकर पहले से तैयारी चल रही है़ विभिन्न स्तर पर प्रतियोगिता करायी गयी है़ प्रतिभागियों की कलाकृति, रचनाओं और कृतियों का प्रदर्शन होगा़
