रांची : झारखंड हाइकोर्ट में गुरुवार को रांची-जमशेदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-33) की दयनीय स्थिति काे लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई हुई.
जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए मौखिक रूप से कहा कि एनएच-33 का फोर लेनिंग कार्य जारी रहना चाहिए. निर्माण कार्य शीघ्र पूरा होना चाहिए. राज्य सरकार की अोर से महाधिवक्ता अजीत कुमार ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर कहा कि एनएचएआइ को साैंपे गये रिंग रोड फेज-वन व फेज-टू के 25 किमी के निर्माण का कार्य हमें वापस कर दें.
हम इसे पूरा करना चाहते हैं, ताकि जल्द रिंग रोड को चालू किया जा सके. राजधानी के बाहरी क्षेत्र में 85 किलाेमीटर लंबे रिंग रोड का निर्माण कार्य किया जा रहा है. इसके फेज-वन व फेज-टू का निर्माण एनएचएआइ द्वारा किया जा रहा है. इसमें विलंब हो सकता है.
खंडपीठ ने नेशनल हाइवे अॉथोरिटी अॉफ इंडिया (एनएचएआइ) को निर्देश दिया कि वह संवेदक कंपनी रांची एक्सप्रेस-वे के रोड निर्माण से संबंधित प्रस्ताव पर विचार करे. इस मुद्दे पर 16 अगस्त को होनेवाली एनएचएआइ बोर्ड की बैठक में संवेदक कंपनी, राज्य सरकार व बैंक के प्रतिनिधियों को भी शामिल करने को कहा. कंपनी के प्रस्ताव पर बोर्ड विचार करे. साथ ही संवेदक कंपनी को रखना है या नहीं, सड़क निर्माण कार्य कौन पूरा करेगा सभी बिंदुओं पर निर्णय लिया जाये.
लिये गये निर्णयों से कोर्ट को अवगत कराया जाये. संवेदक कंपनी को खंडपीठ ने निर्देश दिया कि वह जो भी कहना चाहती है, वह अपना प्रस्ताव लिखित रूप से 13 अगस्त तक शपथ पत्र के माध्यम से दायर कर दें. सभी पक्षों को शपथ पत्र दायर करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 23 अगस्त की तिथि निर्धारित की.
वहीं सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता पराग त्रिपाठी ने खंडपीठ के समक्ष याचिका दायर कर कहा कि संवेदक का अनुबंध समाप्त नहीं किया जाना चाहिए. इससे परेशानी बढ़ेगी. गंभीर वित्तीय संकट पैदा हो जायेगा.
उन्होंने कहा कि संवेदक ने अपने संयंत्र व मशीनरी सहित सभी प्रकार का सहयोग नये संवेदक को देने की पेशकश की है. एनएचएआइ सदस्य (परियोजना) एके सिंह ने खंडपीठ को बताया किया कि एनएचएआइ बोर्ड ने रांची एक्सप्रेस-वे के साथ समझौते को समाप्त करने व दूसरे संवेदक को रखने का निर्णय लेने का फैसला किया है.
हालांकि इस प्रक्रिया में लगभग छह माह का समय लगेगा. फोर लेनिंग निर्माण कार्य में और विलंब हो सकता है. उन्होंने बताया कि एनएचएआइ बोर्ड की बैठक 16 अगस्त को होगी. बैंक की अोर से वरीय अधिवक्ता जय प्रकाश ने खंडपीठ को बताया कि यदि एग्रीमेंट बीच में रद्द हो जाता है, तो बैंक आगे पैसा देने में असमर्थ रहेगा. वह पैसा नहीं दे पायेगा. एग्रीमेंट रद्द होने से बैंक का पैसा फंस जाने की संभावना है.
उल्लेखनीय है कि रांची-जमशेदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की दयनीय स्थिति को झारखंड हाइकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था. रांची-जमशेदपुर एनएच-33 का फोर लेनिंग कार्य वर्ष 2011 से शुरू हुआ, जिसे जून 2015 में पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन आज भी अधूरा है.
संवेदक कंपनी रांची एक्सप्रेस-वे ने पिछले वर्ष अगस्त में कोर्ट में अंडरटेकिंग दी थी कि जुलाई 2018 तक 128 किमी लंबे एनएच का निर्माण कार्य पूरा हो जायेगा, लेकिन वह अधूरा है. उक्त सड़क पर प्रतिदिन लगभग 7000 से अधिक वाहनों का आवागमन होता है. इस सड़क पर हुई दुर्घटनाअों में 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.1000 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं.
