बिशप फेलिक्स टोप्पो होंगे रांची के नये आर्चबिशप आज ग्रहण करेंगे पदभार

रांची : बिशप फेलिक्स टोप्पो रांची आर्चडायसिस के नये आर्चबिशप बनेंगे़ उनका पदभार ग्रहण सोमवार को संत मरिया महा गिरजाघर में सुबह आठ बजे से है़ वे आर्चबिशप के रूप में कार्डिनल तेलेस्फोर पी टोप्पो की जगह लेंगे, जिन्होंने 33 वर्षाें तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली. चौथे आर्चबिशप होंगे फेलिक्स टोप्पो : फेलिक्स टोप्पो […]

रांची : बिशप फेलिक्स टोप्पो रांची आर्चडायसिस के नये आर्चबिशप बनेंगे़ उनका पदभार ग्रहण सोमवार को संत मरिया महा गिरजाघर में सुबह आठ बजे से है़ वे आर्चबिशप के रूप में कार्डिनल तेलेस्फोर पी टोप्पो की जगह लेंगे, जिन्होंने 33 वर्षाें तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली.
चौथे आर्चबिशप होंगे फेलिक्स टोप्पो : फेलिक्स टोप्पो रांची आर्चडायसिस के चौथे आर्चबिशप होंगे़ सर्वप्रथम आर्चबिशप निकोलस कुजूर, आर्चबिशप पीयूष केरकेट्टा व कार्डिनल तेलेस्फाेर पी टोप्पो ने यह पद संभाला है़
फेलिक्स टोप्पो 1968 से सोसाइटी ऑफ जीसस से संबद्ध हैं. सीबीसीआइ सोसाइटी ऑफ मेडिकल एजुकेशन, नॉर्थ इंडिया की गवर्निग बॉडी के चेयरमैन व झान (झारखंड, अंडमान) रीजनल बिशप्स काउंसिल सहित दो क्षेत्रीय कमीशन के अध्यक्ष हैं. ईशशास्त्र अध्ययन केंद्र, संत अलबर्ट कॉलेज रांची के वाइस चांसलर हैं.
उन्होंने 1990 में ग्रेगोरियन यूनिवर्सिटी रोम से मास्टर्स इन साइकोेलॉजी की डिग्री ली है़ 14 जून 1997 को जमशेदपुर का बिशप बनने से पूर्व उन्होंने सोसाइटी ऑफ जीसस के नोविशिएट में नोविस मास्टर व सुपीरियर का पद संभाला़ चार वर्षों तक सीबीसीआइ ऑफिस फॉर द क्लर्जी एंड रिलीजियस व चार वर्षों के लिए ही नेशनल वोकेशन सर्विस सेंटर, पुणे का अध्यक्ष का पद भी संभाला है़
कार्डिनल की उपाधि बरकरार रहेगी : कार्डिनल तेलेस्फाेर पी टोप्पो वर्तमान में देश के चार कार्डिनल्स में से एक हैं और देश के पहले आदिवासी कार्डिनल हैं. उनकी यह उपाधि बरकरार रहेगी़ वे आठ नवंबर 1984 को रांची आर्चडायसिस के डिप्टी आर्चबिशप (कॉडज्यूटोर) चुने गये थे़
सात अगस्त 1985 को आर्चबिशप बने़ 25 अगस्त को पदभार संभाला़ उनकी पहल पर पोप जॉन पॉल द्वितीय 1986 में रांची आये थे़ फादर कांस्टेंट लीवंस के पार्थिव अवशेषों को बेल्जियम से रांची लाने व संत मरिया महागिरजाघर में उसकी स्थापना में अहम भूमिका निभायी़
उनके कार्यकाल में राजा उल्हातू में माइनर बसेलिका की स्थापना हुई़ गुमला, सिमडेगा और खूंटी अलग डायसिस बने़ उन्होंने रिक्शा चालकों, कचरा चुननेवाले बच्चों के लिए योजनाओं के क्रियान्वयन सहित कई सामाजिक कार्यों में भी महती भूमिका निभायी है़ जानकारी के अनुसार वे रांची में ही आर्चबिशप हाऊस में अथवा राजा उलातू में रहेंगे़

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