सरकार के खिलाफ बोलना देशद्रोह नहीं, आवाज दबाने का हो रहा प्रयास

विरोध. जनसंगठनों और राजनीतिक दलों की हुई बैठक, कहा रांची : सामाजिक कार्यकर्ता पर द्रेशद्रोह का केस अग्निवेश मामले में कार्रवाई नहीं : बाबूलाल झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह सरकार जनता की आवाज दबा रही है. खासकर गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यकों की आवाज उठाने वालों को कुचलने का प्रयास किया जाता […]

विरोध. जनसंगठनों और राजनीतिक दलों की हुई बैठक, कहा
रांची : सामाजिक कार्यकर्ता पर द्रेशद्रोह का केस अग्निवेश मामले में कार्रवाई नहीं : बाबूलाल
झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह सरकार जनता की आवाज दबा रही है. खासकर गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यकों की आवाज उठाने वालों को कुचलने का प्रयास किया जाता है. सरकार लाठी-डंडा से विरोध की आवाज दबाने की कोशिश करती रही है. सामाजिक कार्यकर्ता को देशद्रोह के मामले में फंसाया जाता है. वहीं, स्वामी अग्निवेश आदिम जनजाति की बात करने आते हैं, तो उनके साथ मारपीट होती है. उनके साथ मारपीट करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हाेती है, उलटे स्वामी पर केस कर दिया जाता है.
सरकारी आतंक मचाना चाह रही है, केस वापस ले : सुबोधकांत : पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि राज्य में सरकारी आतंक मचाना चाह रहे हैं. सरकार का मानसिक दिवालियापन है कि फेसबुक पर लिखने वालों और सरकार की आलोचना करने वालों पर केस कर दिया गया. लोगों पर जो धारा लगायी गयी है, उसे सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही निरस्त कर दिया है. सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी राय दी है. इन लोगों ने केंद्रीय गृह सचिव को लिख कर दिया है. इनके पत्र पर सरकार कार्रवाई करे.
गृहमंत्री संवाद करने कहते हैं, यहां संवाद नहीं हमला हो रहा : स्टेन स्वामी : सामाजिक कार्यकर्ता स्टेन स्वामी ने कहा कि 20 लोगों पर देशद्रोह का मुकदमा किया गया है और आरोपी को मालूम ही नहीं है. केंद्रीय गृहमंत्री कहते हैं कि पत्थलगड़ी में शामिल लोगों के साथ संवाद करें. यहां संवाद नहीं, हमला हो रहा है. राज्य में पांचवीं अनुसूची का उल्लंघन हो रहा है. टीएसी की बैठक अवैध है. इसके सभी सदस्य आदिवासी होने चाहिए. सीएम एजेंडा तय कर रहे हैं. पेसा कानून का उल्लंघन हो रहा है. मुकदमा वापस होना चाहिए.
देश का पर्याय भाजपा नहीं, देशद्रोह कह देना फैशन हो गया : विनोद सिंह : माले के पूर्व विधायक विनोद सिंह ने कहा कि भाजपा की सरकार में किसी पर देशद्रोह का आरोप लगा देना फैशन हो गया है. देश का पर्याय भाजपा नहीं है और न ही झारखंड का पर्याय रघुवर दास हैं. सरकार की आलोचना करना देशद्रोह नहीं है. सरकार विरोधियों की आवाज दबाना चाहती है.

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