रिम्स हादसा : शॉर्ट सर्किट से इमरजेंसी में भरा धुआं, 20 मिनट तक सांसत में थी 22 मरीजों की जान

रांची : शॉट सर्किट के बाद धुआं भरने के कारण इमरजेंसी वार्ड में अंधेरा छा गया. धुएं की वजह से यहां मौजूद मरीजों और अन्य लोगों का दम घुटने लगा. कुछ भी स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था. अफरातफरी के माहौल में लोग चिल्लाते हुए इधर-उधर भागने लगे. मरीजों को उनके परिजन जैसे-तैसे उठाकर बाहर […]

रांची : शॉट सर्किट के बाद धुआं भरने के कारण इमरजेंसी वार्ड में अंधेरा छा गया. धुएं की वजह से यहां मौजूद मरीजों और अन्य लोगों का दम घुटने लगा. कुछ भी स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था. अफरातफरी के माहौल में लोग चिल्लाते हुए इधर-उधर भागने लगे. मरीजों को उनके परिजन जैसे-तैसे उठाकर बाहर निकलना शुरू कर दिया. कोई मरीज को गोद में उठाकर भाग रहा था, तो कोई कंधे पर.
सूचना मिलने पर ट्रॉली मैन ट्रॉली और सुरक्षा गार्ड स्ट्रेचर लेकर मरीजों को निकलाने में लग गये. मरीजों की जान बचाने के साथ-साथ परिजनों को अपनी जान की भी चिंता थी. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सबकुछ सामान्य चल रहा था. इमरजेंसी में मरीज भर्ती हो रहे थे. तभी करीब अचानक आग लगने का हल्ला होना शुरू हो गया. इसके बाद लोग इमरजेंसी के गेट से ही अपने मरीज को भागने लगे. इधर वार्ड से ट्रॉली व स्ट्रेचर पर लादकर मरीजों को इमरजेंसी के बाहर (दवाई दोस्त के सामने) लाकर रखा जाने लगा. एक मृत व्यक्ति का शव लेकर ट्रॉलीमैन निकला, तो लोग कहने लगे कि एक मरीज की मौत हो गयी है. लेकिन, तभी किसी ने कहा कि इस मरीज की मौत पहले ही हो चुकी थी. उसके शव को ले जाने की प्रक्रिया चल रही थी.
नर्स सरिता सिन्हा ने सबसे पहले देखी थी चिंगारी
इमरजेंसी में कार्यरत नर्स सरिता सिन्हा ने बताया कि वह दवा लेने के लिए इमरजेंसी वार्ड में स्थित स्टोर गयी हुई थीं. हाथ में स्लाइन का बोतल था. वह मरीज के पास जा रही थीं, तभी वायरिंग से चिंगारी निकलती दिखी. उन्होंने जूनियर डॉक्टर से कहा कि वे तत्काल सुरक्षाकर्मियों को सूचना दें. वहीं, जूनियर डाॅक्टर ने सबसे पहले मेन स्विच को गिरा दिया, ताकि कोई बड़ा हादसा नहीं हो. इसके बाद सभी मरीज को वार्ड से बाहर निकालने में जुट गये.
बेटे को गोद में उठाकर बाहर दौड़ पड़ी कलावती
कलावती रजक अपने बेटे मुरली रजक को लेकर दोपहर 12 बजे इमरजेंसी में पहुंची थी. दो घंटे बाद ही हादसा हो गया. कलावती ने बताया जैसे ही वार्ड में धुआं भरा, वह किसी तरह अपने बेटे को उठाया बाहर की ओर भागी. अंधरे में कुछ दिख भी नहीं रहा था. एक बार तो गिरते-गिरते बची. ऐसा लगा कि कहां आ गये. यहां जान बचाने आये थे, कुछ और ही हो रहा है.
रांची : पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे लेकिन अब तक नहीं लिया फायर फाइटिंग का एनओसी
रांची : रिम्स परिसर में शॉर्ट सर्किट की कई घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं. इसके बावजूद लापरवाही का आलम यह है कि अस्पताल प्रबंधन ने अब तक अग्निशमन विभाग से फायर फाइटिंग का एनओसी नहीं लिया है. सुरक्षा के नाम पर अस्पताल में जगह-जगह सिर्फ फायर सिलिंडर जरूर लगाये गये हैं. बीते छह माह में अस्पताल परिसर में तीन जगहों पर शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं.
बेसमेंट में स्थित फिजियोथेरेपी सेंटर, पंजीयन काउंटर और हड्डी रोग विभाग के वार्ड के पास शॉर्ट सर्किट से आग लग चुकी है. इन हादसों के बाद रिम्स प्रबंधन ने अग्निशमन विभाग से आॅडिट कराया था, जिसमें कई खामियां बतायी गयी थीं. फायर फाइटिंग की पुख्ता व्यवस्था का अग्निशमन विभाग की टीम ने निर्देश दिया है. करीब डेढ़
साल पहले मिले ��िर्देश केबाद अभी रिम्स निविदा की
प्रक्रिया को पूरा करने में लगा है. जानकारी के अनुसार अब तक चार बार निविदा निकाली जा चुकी है. वर्तमान में भी निविदा की प्रक्रिया चल रही है, जिसकी बैठक चार अगस्त को होनी है.

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