नवजात की सुरक्षा के लिए स्तनपान जरूरी

रांची : बच्चे का जीवन बचाने तथा उसके बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्तनपान जरूरी है. यह बच्चों को सभी तरह के कुपोषण से बचाता है. हर वर्ष एक से सात अगस्त तक मनाये जाने वाले स्तनपान सप्ताह के इस वर्ष का थीम -स्तनपान : जीवन का एक आधार, है. स्तनपान करने वाले बच्चों की बौद्धिक […]

रांची : बच्चे का जीवन बचाने तथा उसके बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्तनपान जरूरी है. यह बच्चों को सभी तरह के कुपोषण से बचाता है. हर वर्ष एक से सात अगस्त तक मनाये जाने वाले स्तनपान सप्ताह के इस वर्ष का थीम -स्तनपान : जीवन का एक आधार, है. स्तनपान करने वाले बच्चों की बौद्धिक क्षमता तीन से चार प्वाइंट बढ़ जाती है तथा इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. छह माह से कम उम्र के बच्चे, जिन्हें लंबे समय तक सिर्फ मां का दूध पिलाया जाता है, उन्हें संक्रमण व मृत्यु का खतरा कम हो जाता है. स्तनपान के दौरान बच्चे को दुलारना तथा उससे बातें करना, बच्चे के बौद्धिक विकास में सहायक है.

बेहतर निवेश है स्तनपान : आंकड़ों का शोध बताता है कि स्तनपान में किये गये एक डॉलर के निवेश से करीब 35 डॉलर की आर्थिक वापसी होती है. पहले छह माह तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध देने की दर यदि 50 फीसदी भी हो जाये, तो इससे अगले 10 वर्षों के दौरान 5.20 लाख बच्चों की जान बचायी जा सकती है.
शिशु दुग्ध अनुकल्प, पोषण बोतल एवं शिशु खाद्य (उत्पादन, आपूर्ति एवं वितरण का विनियमन) अधिनियम, 1992 को दोबारा लागू करने तथा इसके प्रभावी कार्यान्वयन की जरूरत है. मातृत्व लाभ अधिनियम को लागू किया जाना चाहिए तथा कार्य स्थलों पर माताओं को सहयोग प्रदान किया जाना चाहिए.
डॉ मधुलिका जोनाथन, यूनिसेफ की झारखंड प्रमुख
झारखंड में स्तनपान की स्थिति
शुरुआती स्तनपान : 33 फीसदी
छह माह तक विशेष स्तनपान : 65 फीसदी
पूरक आहार (छह से आठ माह के बीच) : 47 फीसदी
समुचित आहार पाने वाले छह से 23 माह के बच्चे : सिर्फ सात फीसदी

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