रांची : नये भारत की आकांक्षा का उपन्यास है राग दरबारी
रांची : प्रगतिशील लेखक संघ के तत्वावधान में रविवार को टीआरआइ में परिचर्चा का आयोजन हुआ. इसमें श्रीलाल शुक्ल के उपन्यास राग दरबारी के 50 वर्ष पूरे होने पर लेखकों अौर साहित्यकारों ने अपने विचार रखे. आलोचक रवि भूषण ने कहा कि राग दरबारी स्वतंत्र भारत का आख्यान अौर प्रत्यख्यान है. यह बौद्धिक दिवालियापन का […]
रांची : प्रगतिशील लेखक संघ के तत्वावधान में रविवार को टीआरआइ में परिचर्चा का आयोजन हुआ. इसमें श्रीलाल शुक्ल के उपन्यास राग दरबारी के 50 वर्ष पूरे होने पर लेखकों अौर साहित्यकारों ने अपने विचार रखे. आलोचक रवि भूषण ने कहा कि राग दरबारी स्वतंत्र भारत का आख्यान अौर प्रत्यख्यान है. यह बौद्धिक दिवालियापन का सुंदर उदाहरण है. यह संपूर्ण भारत को बदलनेवाला प्रस्तावना है. यह नये भारत की आकांक्षा का उपन्यास है.
वरिष्ठ साहित्यकार सह डॉ राम दयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान के निदेशक रणेंद्र ने कहा कि राग दरबारी के पंक्तियों से जो नहीं गुजरा है, वह उसके आकर्षण से वंचित है. यद्यपि कई समीक्षकों ने इसे दोयम दर्जे का उपन्यास कहा है, फिर भी कालजयी रचनाअों में गोदान, मैला आंचल के बाद राग दरबारी का स्थान आता है. फणीश्वरनाथ रेणु अौर हरिशंकर परसाई के दर्शन एक जगह करना हो, तो आप राग दरबारी से गुजर सकते हैं.
केंद्रीय विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रत्नेश ने कहा कि श्री लाल शुक्ल ने इस उपन्यास के माध्यम से व्यवस्था पर चोट की है. मौके पर समाजशास्त्री श्यामाचरण दुबे, प्रो अजय वर्मा, डॉ मिथिलेश, रांची दूरदर्शन केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ पीके झा, डॉ कुमुद कला मेहता, सुधीर सुमन, पत्रकार कमलेश, कथाकार पंकज मित्र सहित अन्य ने भी अपने विचार रखे. कार्यक्रम में डॉ अशोक प्रियदर्शी, महादेव टोप्पो, डॉ जिंदर सिंह मुंडा सहित अन्य उपस्थित थे.
रांची : साहित्यिक संस्था शब्दकार के तत्वावधान में रविवार को श्रीराम गार्डेन कांके रोड में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. इसमें महाकवि नीरज को श्रद्धांजलि दी गयी. उपस्थित लोगों ने महाकवि की तस्वीर पर फूल चढ़ाये और उनसे जुड़े संस्मरण साझा किये. कवि कुमार बृजेंद्र ने इस अवसर पर कहा कि नीरज का समय जोखिम भरा था.
उनको बार-बार खारिज किया गया, मगर हिंदी की पताका को लेकर वे मंच पर खड़े रहे. उनका व्यक्तित्व सरल और ईमानदार रहा है. उनके गीतों के बिंब जिंदगी से निकले हैं और उनकी बात लोगों तक सरलता से संप्रेषित होती है. डॉ जेबी पांडे ने बताया कि नीरज ने एक बार कहा था कि मैं कविता के बिना जिंदा नहीं रह सकता. कवि मरता नहीं.
बीना श्रीवास्तव ने कहा मैं उनसे कई बार मिली और प्रभावित हुई हूं. मेरे दो संकलन के लिए उन्होंने लिखा. सभा में उपस्थित सभी साहत्यिक प्रेमियों ने उनके गीत और कविताएं सुनायीं. रिंकू बनर्जी ने महाकवि नीरज का गीत मेघा छाये आधी रात बैरन बन गयी निंदिया सुनाकर सबको मोहित किया.
अमिताभ प्रियदर्शी ने स्वरचित रचना सुनायी. कार्यक्रम में रेणु झा, संध्या चौधरी, विनोद कुमार, प्रवीण गुप्त, मीरा सोनी, पंकज, संगीता कुजारा टॉक, रेणु मिश्रा, इमरान, अलोक, गिरिजा सोनी कोमल, रश्मि शर्मा, सूरज श्रीवास्तव सहित अन्य ने भी नीरज की रचनाएं सुनायीं.
रांची : अंजुमन-बका-ए अदब, रांची के तत्वावधान में रविवार को होटनल केन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान सेवानिवृत्त न्यायाधीश विक्रमादित्य प्रसाद एवं प्रशांत करण को हिंदी साहित्य सम्मान 2018 से सम्मानित किया गया. उन्हें प्रशस्ति पत्र, पुष्प गुच्छ, मोमेंटो एवं शॉल भेंट किये गये. इसके बाद कुदरतुल्लाह कुदरत का काव्य संग्रह गुबार-ए-जां का विमोचन किया गया.
आयोजन के मुख्य अतिथि रांची विवि के पूर्व कुलपति एए खान, विशिष्ट अतिथि झारखंड अंजुमन तरक्कीय उर्दू के अध्यक्ष प्रो अबूजर उसमानी, रांची विवि के पूर्व उर्दू विभागाध्यक्ष अहमद सज्जाद और रांची विवि के हिंदी विभागाध्यक्ष जंग बहादुर पांडेय उपस्थित थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता जाने-माने शायर हैरत फर्रूखाबादी ने की. संचालन महासचिव नसीर अफसर ने किया. धन्यवाद ज्ञापन मो समिउल्लाह खान असदफी ने किया.
मुशायरा व कवि सम्मेलन में झारखंड हिंदी साहित्य संस्कृति मंच के अध्यक्ष कामेश्वर श्रीवास्तव निरंकुश, शान भारती, अजफर जमील, डॉ मसूद जामी, नेहाल हुसैन सरैयावी, कुदरतुल्लाह कुदरत, दिलशाद नजमी, सुहैल सईद, एजाज अनवर, अख्तर रांचवी, नेजाम कादरी, अब्दुससलाम राजन, मंजूर बेग, हारून खुमार, प्रशांत करण, निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव, प्रणव प्रियदर्शी, गीता सिन्हा गीतांजलि, असित कुमार, नीतू सिन्हा, पूजा शकुंतला, माधवी मेहर, शिल्पी सुमन आदि शामिल थे.
