आदिवासी छात्र संघ ने किया संघ की दशा-दिशा पर हुआ मंथन
रांची : आदिवासी छात्र संघ (एसीएस) का 18वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया़ इस अवसर पर संगम गार्डेन, मोरहाबादी में एसीएस की दशा-दिशा पर चर्चा की गयी़ केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव ने कहा कि आदिवासी छात्र संघ का पहला मुद्दा आदिवासी है़ सरना या ईसाई नही़ं एसीएस हर आदिवासी के हक-अधिकार की वकालत करता है़ 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा को सरना कोड पर अपना स्टैंड स्पष्ट करना चाहिए़ केंद्र व राज्य में इसकी बहुमत की सरकार है.
गैर आदिवासी पिता से उत्पन्न संतान को न मिले आरक्षण का लाभ : श्री उरांव ने कहा कि स्थापना के समय से ही आदिवासी छात्र संघ आरक्षण, सरना कोड, विस्थापन, जनजातीय भाषाओं की पढ़ाई, पेसा कानून, पांचवीं अनुसूची, स्थानीयता नीति आदि मुद्दों पर मुखर रहा है़
इन विषयों पर जागरूकता अभियान चलाया गया है. छात्र सड़क पर भी उतरे है़ं एसीएस की बदौलत बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल में आदिवासियों के लिए 32 प्रतिशत आरक्षण पर सहमति बनी थी, पर उनके हटते ही इसे कम कर दिया गया़ 2001 में सरना नहीं, तो जनगणना नहीं का अभियान चला़ उन्होंने कहा कि गैर आदिवासी पिता और आदिवासी मां से उत्पन्न संतान को अनुसूचित जनजाति आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए़
आरक्षण में गड़बड़ी का प्रयास :संघ के संयोजक जलेश्वर भगत ने कहा कि सरकार द्वारा गलत स्थानीय नीति लाकर आरक्षण में गड़बड़ी का प्रयास किया जा रहा है़ आरक्षण अधिकार मोर्चा के अजय चौधरी ने कहा कि राज्य में एसटी के लिए 26, ओबीसी के लिए 14 व एससी के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण है़ नौकरियों में 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित व 50 प्रतिशत अनारक्षित होती है़ं
अनारक्षित सीटों का अर्थ यह नहीं है कि वे सिर्फ चार (उच्च) जातियों के लिए है़ं अनारक्षित का अर्थ ओपन कैटेगरी है, जिसे मेरिट के क्रम में दिया जाना है, लेकिन इसमें भी गड़बड़ी की जा रही है़ दारोगा बहाली में एसटी को 26 की जगह सिर्फ 14 प्रतिशत सीटें दी गयी़ं कार्यक्रम को सविता खाखा, सुनील मुंडा, प्रमोद मर्मू, जय प्रकाश मरांडी, चंद्रदेव उरांव आदि ने संबोधित किया.