हाइकोर्ट ने प्रोन्नति में आरक्षण पर लगी रोक हटायी, सभी कैडरों में अिधकािरयों व कर्मियों को प्रोन्नत करने का रास्ता साफ

अंतिम फैसला आने पर प्रभावित होगी प्रोन्नति सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ का फैसला आने के बाद हाइकोर्ट में मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जायेगा रांची : राज्य में सभी कैडर के अधिकारियों व कर्मचारियों की प्रोन्नति का रास्ता साफ हो गया है. झारखंड हाइकोर्ट ने अपने पूर्व के आदेश में संशोधन करते […]

अंतिम फैसला आने पर प्रभावित होगी प्रोन्नति

सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ का फैसला आने के बाद हाइकोर्ट में मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जायेगा
रांची : राज्य में सभी कैडर के अधिकारियों व कर्मचारियों की प्रोन्नति का रास्ता साफ हो गया है. झारखंड हाइकोर्ट ने अपने पूर्व के आदेश में संशोधन करते हुए प्रोन्नति में आरक्षण पर लगी रोक को हटा लिया है. राज्य सरकार अब विधि अनुसार आरक्षित श्रेणी से आरक्षित श्रेणी, अनारक्षित श्रेणी से अनारक्षित श्रेणी व मेरिट प्रोन्नति दे सकती है. पर इस मामले में अंतिम फैसला आने पर प्रोन्नति प्रभावित होगी. सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ का फैसला आने के बाद हाइकोर्ट में मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जायेगा. बुधवार को एक्टिंग चीफ जस्टिस डीएन पटेल व जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता की खंडपीठ में झारखंड सरकार की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका (आइए) पर सुनवाई हुई. करीब साढ़े तीन घंटे तक चली सुनवाई के बाद खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया.
क्या है मामला
फॉरेस्ट रेंज अॉफिसर अमरेंद्र कुमार सिंह ने याचिका दायर कर अपने से कनीय अधिकारी को प्रोन्नति देने का मामला उठाया था. उक्त याचिका पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने 17 फरवरी 2017 को प्रोन्नति में आरक्षण का लाभ देने पर रोक लगा दी थी. तब से रोक जारी थी. कार्मिक, प्रशासनिक सुधार व राजभाषा विभाग की अोर से हस्तक्षेप याचिका दायर कर प्रोन्नति में आरक्षण का लाभ देने पर लगी रोक हटाने का आग्रह किया गया था.
सरकार की अोर से महाधिवक्ता अजीत कुमार ने खंडपीठ को बताया, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पारित किया है. केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट अॉफ पर्सनल एंड ट्रेर्निंग (डीअोपीटी) की ओर से पत्र जारी कर प्रोन्नति देने पर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है. महाधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों जैसे इंदिरा साहनी, एम नागराज, एम चेलैया मामले में पारित आदेश का हवाला दिया. उन्होंने कहा, झारखंड में बनायी गयी प्रोन्नति नियमावली को गैरवाजिब नहीं ठहराया जा सकता है. एसटी, एससी व अोबीसी वर्ग आज भी पिछड़ा हुआ है. इन वर्गों के समग्र उत्थान व विकास के लिए सरकार प्रोन्नति में आरक्षण का लाभ देना चाहती है.
प्रार्थी फॉरेस्ट रेंज अॉफिसर अमरेंद्र कुमार सिंह की अोर से अधिवक्ता डॉ अशोक कुमार सिंह ने महाधिवक्ता की दलील का विरोध करते हुए कहा, प्रोन्नति में आरक्षण का लाभ देने के पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने एम नागराज मामले में गाइडलाइन तय किया था. प्रोन्नति में आरक्षण का लाभ देने के पूर्व छह बिंदुअों पर कार्रवाई करने को कहा है. लेकिन सरकार ने छह बिंदुअों पर कोई कार्रवाई नहीं की है. सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण भी नहीं किया गया है. ऐसी स्थिति में आरक्षित कैटेगरी में प्रोन्नति पर लगी रोक को हटाने का कोई आैचित्य नहीं है.

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