एक किमी स्मार्ट सड़क बनाने में खर्च होंगे 14 करोड़ रुपये

रांची: राजधानी में प्रस्तावित स्मार्ट सड़कें 14 करोड़ रुपये प्रति किमी की लागत पर बनायी जायेंगी. इसमें भूमि अधिग्रहण और मुआवजा राशि शामिल नहीं है. स्मार्ट सड़क बनाने का काम एक्सल वेंचर दिनेश चंद्र अग्रवाल को दिया गया है. जानकारी के अनुसार राजभवन से बिरसा चौक तक करीब 11 किमी लंबी स्मार्ट सड़क के निर्माण […]

रांची: राजधानी में प्रस्तावित स्मार्ट सड़कें 14 करोड़ रुपये प्रति किमी की लागत पर बनायी जायेंगी. इसमें भूमि अधिग्रहण और मुआवजा राशि शामिल नहीं है. स्मार्ट सड़क बनाने का काम एक्सल वेंचर दिनेश चंद्र अग्रवाल को दिया गया है.

जानकारी के अनुसार राजभवन से बिरसा चौक तक करीब 11 किमी लंबी स्मार्ट सड़क के निर्माण पर 464.9 करोड़ खर्च किये जायेंगे. इसमें भूमि अधिग्रहण अौर मुआवजा पर 302.6 करोड़ खर्च किये जायेंगे. वहीं, एयरपोर्ट से बिरसा चौक तक की लगभग तीन किमी लंबी स्मार्ट सड़क के निर्माण पर 89.33 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इस राशि में भी भूमि अधिग्रहण और मुआवजा पर खर्च किये जाने 47.21 करोड़ रुपये शामिल हैं.

भूमि अधिग्रहण व मुआवजा की राशि को छोड़ कर एयरपोर्ट से बिरसा चौक तक सड़क निर्माण के लिए 42.12 करोड़ और बिरसा चौक से राजभवन तक की सड़क को स्मार्ट बनाने पर 162.3 करोड़ रुपये खर्च किये जाने हैं. यानी, मुआवजे की राशि को हटा कर प्रति किमी स्मार्ट सड़क बनाने की लागत 14 करोड़ रुपये प्रति किमी आयेगी.
30 मीटर तक होगी सड़क की चौड़ाई : स्मार्ट सड़क का डीपीआर मेकॉन ने तैयार किया है. स्मार्ट सड़क की कुल चौड़ाई 30 मीटर तक होगी. इसमें सड़क के दोनों तरफ छह-छह मीटर के पैदल पथ बनाये जायेंगे. बीच में डिवाइडर दो मीटर का होगा. दोनों तरफ काली सड़क की चौड़ाई 7.5 मीटर की होगी. सड़क पर लगभग 2.5 मीटर पर केवल नन मोटराइज्ड वाहनों के लिए लेन होगा. इस पर साइकिल व रिक्शा को ही चलने की अनुमति होगी. 3.5 मीटर सड़क पैदल पथ होगी. इस छह मीटर के पैदल पथ में अंडरग्राउंड यूटिलिटी डक्ट होगा. इसमें अंडरग्राउंड बिजली के केबुल, टेलीफोन के केबुल के साथ-साथ पानी का सर्विस पाइपलाइन भी होगा. भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए गैस पाइपलाइन का डक्ट भी बनाया जायेगा. छह मीटर जगह पर जगह-जगह डस्टबिन लगाये जायेंगे. स्मार्ट सड़कों पर 50 से 100 मीटर की दूरी पर पैदल चलने वाले लोगों के लिए बेंच लगाये जायेंगे. इस छह मीटर में मोटराइज्ड वाहनों को जाने की अनुमति नहीं होगी.
नौ करोड़ प्रति किमी है सड़क निर्माण की एनएचआइए की लागत
नेशनल हाइवे अथोरिटी ऑफ इंडिया द्वारा बनायी जाने वाली फोर लेन सड़कों की लागत फिलहाल प्रति किमी नौ करोड़ रुपये है. एनएचआइए की ओर से इसे बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये प्रति किमी करने की मांग भारत सरकार से की जा रही है. हालांकि, भारत सरकार ने अब तक लागत बढ़ाने पर सहमति नहीं प्रदान की है.
डिवाइडर के नीचे होगी सीवर लाइन
स्मार्ट सड़क का डिवाइडर दो मीटर का होगा. डिवाइडर के नीच सीवर लाइन होगा. स्ट्रीट लाइट भी डिवाइडरों पर लगाये जायेंगे. सड़क के किनारे जगह-जगह पेड़ लगायें जायेंगे. डिवाइडर के नीचे पानी का पाइपलाइन भी होगा. ताकि कभी भी लीकेज आदि होने पर सड़क न खोदना पड़े. डिवाइडर के ऊपर हरी घास बिछायी जायेगी. मेकॉन द्वारा तैयार किये गये डीपीआर में सड़क निर्माण के दौरान एक पेड़ कटने के एवज में 10 पेड़ अन्यत्र लगाने का प्रावधान किया गया है. पेड़ों को बिना काटे हुए ही अन्यत्र स्थापित करने की योजना बनायी गयी है.

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