श्रावणी मेला में लगी थी ड्यूटी, पर कर रहे थे तिलैया में प्राइवेट प्रैक्टिस
कोडरमा: जिले के कुछ निजी अस्पतालों पर नियमों का पालन नहीं करने के मामले में तो प्रशासनिक शिकंजा कस ही रहा है, पर इस बीच बीते दिनों गायत्री हॉस्पीटल में डायलिसिस के दौरान एक मरीज की मौत मामले में विभागीय जांच में सनसनीखेज बात सामने आयी है. नये खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग के कुछ […]
विभागीय जांच में सामने आया है कि जिस गायत्री हॉस्पीटल में आठ अगस्त को संचालक डाॅ अरुण कुमार की मौजूदगी में मरीज की डायलिसिस के दौरान मौत हुई, उस दिन डाॅ अरुण की ड्यूटी श्रावणी मेला दुमका में थी. यही नहीं बकायदा वे सरकारी तौर पर वहां ड्यूटी पर मौजूद भी दिखाये गये हैं. इसे लेकर एक विरमित पत्र भी दुमका के सिविल सर्जन द्वारा जारी किया गया है.
जारी पत्र में डाॅ अरुण कुमार को दुमका के पदस्थापित स्थल से नौ अगस्त को दोपहर बाद विरमित दिखाया गया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है की जब डाॅ अरुण की ड्यूटी श्रावणी मेला में थी, वे सरकारी ड्यूटी पर थे वह भी श्रावणी मेला की, तो तिलैया के निजी अस्पताल में कैसे प्रैक्टिस कर रहे थे. अब इस नये खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग पर ही सवाल उठे हैं. वहीं पदाधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं. हालांकि, पूरे मामले पर कोडरमा के सिविल सर्जन डाॅ बीपी चौरसिया ने कहा है कि इस तरह का मामला सामने आया है. डाॅ अरुण से स्पष्टीकरण मांगा जायेगा. जानकारी के अनुसार बीते आठ अगस्त को झुमरीतिलैया बाइपास रोड में संचालित गायत्री हॉस्पीटल में देर रात करीब आठ बजे जम कर हंगामा हुआ था. अस्पताल में मरीज सत्यनारायण यादव निवासी तिलैया बस्ती की डायलिसिस के दौरान मौत हो गयी थी. मृतक के पुत्र जयकुमार का आरोप था कि उनके पिता का पूर्व में बाहर में डायलिसिस हुआ था. आठ अगस्त की शाम को वे अपने पिता को लेकर गायत्री हॉस्पीटल पहुंचे तो डाॅ अरुण कुमार ने अस्पताल में डायलिसिस की सभी सुविधा मौजूद रहने की बात कही. ऐसे में पैसा जमा करने के बाद पिता का डायलिसिस शुरू किया गया. डायलिसिस टेक्नीशियन बम शंकर ने शुरू किया. इसी बीच उनके अन्य परिजन आये तो उन्होंने डाॅ अरुण से पूछा तो कहा कि सब कुछ ठीक है. कुछ देर बाद डाॅ अरुण ने कहा कि मरीज सीरियस है. इसे रांची ले जाइये रेफर कर दे रहे हैं. जब वे अपने पिता को लेकर दूसरे निजी अस्पताल में पहुंचे, तो वहां बताया गया की मरीज की मौत करीब आधे घंटे पहले हो गयी है. जय ने अस्पताल प्रबंधन, टेक्नीशियन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया तो बाद में मामला किसी तरह शांत हो गया. इस हंगामे के मामले में नया मोड़ तब आया जब अगले ही दिन डाॅ अरुण कुमार एक आवेदन लेकर तिलैया थाना पहुंचे और जयकुमार व अन्य पर 10 लाख का अलग-अलग चेक जबरन ले लेने का आरोप लगाया. इस हंगामे व आरोपों के बीच मामला प्रशासन तक भी पहुंचा. इसी बीच बात सामने आयी की डाॅ अरुण कुमार की ड्यूटी आठ अगस्त को श्रावणी मेला में थी. ऐसे में ड्यूटी के समय निजी अस्पताल में उनकी मौजूदगी ने कई सवाल उठा दिये हैं. इस संबंध में पूरी रिपोर्ट सिविल सर्जन तक पहुंच गयी है. इसके आधार पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.
